हर कोई घर से निकलता कुछ खरीदने या कुछ बेचनेया फिर नगद याउधार ये है बाजारकुछ ऐसे भी है न लाभ न हानि ना हिसाब न किताबऔर सिर्फ खाली हाथ उनके लिए सिर्फ इक चक्कर है बाज़ार और शाम को घर आ कर सोचते हैधरती गोल है बाकि सब के लिए धरतीचपटी तिकोनी गज फुट इंच और ब्याज है जो …
बाजार

