हर कोई अधूरा है मेरी कविताओ जैसा तेरीकहानियों जैसा…………….
हर कोई अधुरा…….
हर कोई अधूरा है मेरी कविताओ जैसा तेरीकहानियों जैसा…………….
वो मुझे कहता है बात कर मैं बाते मारने के लिए उस से बात करता हूँलेकिन बाते मरती नही बल्कि नई बातो को जन्म देती है मै और वो जब मिलते है तो तेरी बाते करते है फिर नई बात जन्म लेती है नए अर्थो के साथ बिना शब्दों के वो कहता है की हम दोनों के इलावा ये तीसरा …
वो मुझे कहता है बात कर मैं बाते मारने के लिए उस से बात करता हूँलेकिन बाते मरती नही बल्कि नई बातो को जन्म देती है मै और वो जब मिलते है तो तेरी बाते करते है फिर नई बात जन्म लेती है नए अर्थो के साथ बिना शब्दों के वो कहता है की हम दोनों के इलावा ये तीसरा …
पापा देखोमैं इक कदम पे हूँअभी दूसरा कदम नही रखा है मैंनेजानते हो दूसरा कदम ज़मीन पे लगते ही लोग आउट आउट बोलने लगते है पापा……क्यों सबको मेरा दूसरा क़दम इतना नागवार हैक्यों सब मुझे एक क़दम पर ही देखना चाहते हैंपापा….ज़िन्दगी का नाम दौड़ना हैरेंगना नहीँ……पापा मुझे रेंगना नहीं दौड़ना है…उड़ना है ……………….सपनों के पंख लगाकर देखना इक दिनआप …
पापा देखोमैं इक कदम पे हूँअभी दूसरा कदम नही रखा है मैंनेजानते हो दूसरा कदम ज़मीन पे लगते ही लोग आउट आउट बोलने लगते है पापा……क्यों सबको मेरा दूसरा क़दम इतना नागवार हैक्यों सब मुझे एक क़दम पर ही देखना चाहते हैंपापा….ज़िन्दगी का नाम दौड़ना हैरेंगना नहीँ……पापा मुझे रेंगना नहीं दौड़ना है…उड़ना है ……………….सपनों के पंख लगाकर देखना इक दिनआप …
रीजक(रोजी-रोटी)बिखेर दी संसार में उसने हवा में उछाल के उसको इकठ्ठा करने के लिए भटकता रहा सूखे पते की तरह मेरा जीवन ………..आज देर रातघर लौटा हूँ बड़े दिनों बाद वो भी खाली जेबखाली हाथजानता हूँ मैं की …….कुछ कमाई ऐसी भी होती हैजो सिर्फ मिलती हैपरखने के बाद या दुनिया में ना होने के बाद ….इसलिए तो..उड़ रही है …
रीजक(रोजी-रोटी)बिखेर दी संसार में उसने हवा में उछाल के उसको इकठ्ठा करने के लिए भटकता रहा सूखे पते की तरह मेरा जीवन ……….. आज देर रात घर लौटा हूँ बड़े दिनों बाद वो भी खाली जेब खाली हाथ जानता हूँ मैं की ……. कुछ कमाई ऐसी भी होती है जो सिर्फ मिलती है परखने के बाद या दुनिया में ना …
वो अकेला जा रहा था उसके पास कुछ भी नही था बस कुछ किस्से कुछ कहानियाँ थी और खाली हाथ सुनसान सड़क पे उस ने बोला था इक दिन मुझ से और कितनी भी बचत कर लो आखिर बचता भी क्या है ढेर भर राख कुछ हड्डिया पानी में बहाने के लिए और चार दिन संस्कार घर की दीवार पे …
वो अकेला जा रहा था उसके पास कुछ भी नही था बस कुछ किस्से कुछ कहानियाँ थी और खाली हाथ सुनसान सड़क पे उस ने बोला था इक दिन मुझ से और कितनी भी बचत कर लो आखिर बचता भी क्या है ढेर भर राख कुछ हड्डिया पानी में बहाने के लिए और चार दिन संस्कार घर की दीवार पे …
बाल मंदिर स्कूल के प्रांगण में 46 वें वार्षिक उत्सव के भव्य एवं गौरवशाली …
गुरु नानक कॉलेज किल्लियांवाली के पूर्व छात्र संघ की वार्षिक आम बैठक 14 नवंबर …
डबवाली शहर के कॉलोनी रोड स्थित श्री अन्नपूर्णा हनुमान मंदिर के समीप स्थित सम्राट …
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