पापा देखोमैं इक कदम पे हूँअभी दूसरा कदम नही रखा है मैंनेजानते हो दूसरा कदम ज़मीन पे लगते ही लोग आउट आउट बोलने लगते है पापा……क्यों सबको मेरा दूसरा क़दम इतना नागवार हैक्यों सब मुझे एक क़दम पर ही देखना चाहते हैंपापा….ज़िन्दगी का नाम दौड़ना हैरेंगना नहीँ……पापा मुझे रेंगना नहीं दौड़ना है…उड़ना है ……………….सपनों के पंख लगाकर देखना इक दिनआप …
बेटी…..

