इक उम्र और ख्बाव और अहसास व्अपनापनजैसे कुछ शब्द जब मेरे आसपास होते है तो मैं खुद को खुदा समझता हूँवापिस लौट जाता हूँ उसी मुहल्ले की गली में जहां बचपन में बरसात होती थी और मैं भीगता नही नहाता था पानी में अपने पैरो को जोर जोर से पटकता था जो पानी उस वक्त उछलता था वो ही मेरी …
सावन……की बरसात

