Home News Point महिलाओं के लिए सकारात्मक माहौल हेतु समाज के नज़रिए व सोच में बदलाव अनिवार्य शर्त: डा. संदीप गोयल

महिलाओं के लिए सकारात्मक माहौल हेतु समाज के नज़रिए व सोच में बदलाव अनिवार्य शर्त: डा. संदीप गोयल

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समतापरक समाज के निर्माण हेतु महिलाओं की शत-प्रतिशत भागीदारी अनिवार्य: डा. मीत

जीएनसी सिरसा में महिला प्रकोष्ठ के तत्वावधान में व्याख्यान श्रृंखला ‘संवेदना’ का हुआ शुभारंभ
सिरसा: 21 अगस्त:
महिलाओं के लिए सुरक्षित एवं सकारात्मक माहौल सुनिश्चत बनाए जाने हेतु महिलाओं के प्रति समाज विशेषतः पुरुषों का अपनी सोच एवं नज़रिए में बुनियादी परिवर्तन लाना अनिवार्य शर्त है। यह विचार राजकीय नैशनल महाविद्यालय, सिरसा में महिला प्रकोष्ठ के तत्वावधान में ‘महिला संवेदनशीलता अभियान’ के अंतर्गत व्याख्यान श्रृंखला ‘संवेदना’ का शुभारंभ करते हुए प्राचार्य डा. संदीप गोयल ने अपने संबोधन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय की यह पहल समाज में औरतों के प्रति व्याप्त एवं स्थापित नज़रिए में बदलाव का एक प्रयास है। यदि पुरुष विशेषतः लड़के संवेदनशीलता से महिलाओं से जुड़े मुद्दों को समझ पाएं और उनके प्रति अपने नज़रिए और व्यवहार को गरिमापूर्ण रखें तो समाज अपने आप बदल जाएगा। प्रगतिशील एवं स्वस्थ समाज की पहचान उसकी संस्थाओं में व्यवहारिक तौर पर समता एवं समानता का होना ही है। महाविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डा. हरविंदर सिंह ने यह जानकारी देते हुए बताया कि प्राचार्य डा. संदीप गोयल की अध्यक्षता व महिला प्रकोष्ठ प्रभारी डा. मीत के संयोजन में आयोजित इस अभियान के बारे में अवगत करवाते हुए डा. मीत ने कहा कि महिला प्रकोष्ठ का उद्देश्य महिलाओं से संबंधित सामाजिक मुद्दों स्वास्थ्य, रोजगार और लिंग संबंधी मामलों के बारे में जागरूकता का प्रचार और प्रसार करना है। उन्होंने लैंगिक संवेदनशीलता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महिलाएं पुरुषों से किसी भी मामले में कम नहीं और एक स्वस्थ, सशक्त एवं समतापरक समाज के निर्माण के लिए इसमें महिलाओं की शत-प्रतिशत भागीदारी अनिवार्य है। महिलाओं को समाज में उनका बनता स्थान प्रदत्त करने के लिए जेंडर सेंसेटाइजेशन यानि लैंगिक संवेदनशीलता जरूरी है। महिला प्रकोष्ठ के सदस्यों डा. मीत, डा. हरविंदर कौर, डा. इंदिरा जाखड़ डा. कर्मजीत कौर, प्रो. गीता, डा. सरोज बाला, प्रो. मीनाक्षी, प्रो. वंदना कटौच, डा. मनदीप कौर व एलए सरिता के नेतृत्व में लैंगिक संवेदनशीलता अभियान की शुरुआत करते हुए महाविद्यालय के लगभग 600 छात्र-छात्राओं को व्याख्यान के माध्यम से लैंगिक असमानता, यौन उत्पीड़न व महिलाओं से संबंधित सामाजिक मुद्दों व समानता के बारे में जागरूक किया गया। महिला प्रकोष्ठ सदस्यों के अलावा डा. सुनीता सेठी, डा. हरविंदर सिंह, डा. स्मृति कंबोज, डा. साक्षी मेहता, प्रो. मंजू गंडा, डा. अनीता मड़िया, डा. मंजू मेहता, डा. शोभा, डा. लखवीर सिंह, प्रो. अमनदीप कौर, डा. मीनू रानी, डा. दीपावली, डा. प्रियंका, प्रो. राजविंदर कौर, प्रो. संदीप कुमार, प्रो. सुनील कुमार व प्रो. रमेश कुमार ने भी व्याख्यानों के माध्यम से विद्यार्थियों को लैंगिक संवेदना से संबंधित विभिन्न मुद्दों के बारे में विस्तृत जानकारियां प्रदान कीं।

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