नाटक ‘आवाज़’ के मंचन से महिलाओं के मर्म को दी ज़ुबाँ

जीएनसी सिरसा में सफलतापूर्वक संपन्न हुई पांच दिवसीय थिएटर कार्यशाला
सिरसा: 3 सितंबर:
महिलाओं को समाज में व्याप्त बुराईयों, कुरीतियों, उनके ख़िलाफ़ हो रहे जुर्म, भेदभाव और अन्याय के प्रति जागरूक होते हुए उनके विरुद्ध सक्रियता भी दिखानी होगी। महिलाओं को हर गलत प्रवृत्ति के विरुद्ध अपनी आवाज़ बुलंद करनी चाहिए। यह विचार राजकीय नैशनल महाविद्यालय, सिरसा के प्राचार्य डा. संदीप गोयल ने महाविद्यालय में परफार्मिंग आर्ट्स क्लब व ड्रामा क्लब के तत्वावधान में संस्कार भारती शाखा, सिरसा व केएल थिएटर प्रोडक्शन के सहयोग से आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला के समापन सत्र में नाटक ‘आवाज़’ के मंचन उपरान्त अपने अध्यक्षीय संबोधन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि एक मंझे हुए रंगकर्मी एवं नाट्य निर्देशक कर्ण लढा के प्रशिक्षण एवं निर्देशन में इस नाटक के मंचन में प्रशिक्षु विद्यार्थी कलाकारों ने जिस प्रतिभा का प्रदर्शन किया है, वह काबिले-तारीफ़ है। उन्होंने उपस्थितजन का आह्वान किया कि जिस तरह इस नाटक में महिलाओं के प्रति हिंसा, कन्या भ्रूण हत्या, बलात्कार, दहेज, तेज़ाब, ऑनर किलिंग इत्यादि मुद्दों को अभिव्यक्ति प्रदान करते हुए महिलाओं के पक्ष में जो आवाज़ बुलंद की गई है वह किसी भी कीमत पर उसे दबने न दें।

महाविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डा. हरविंदर सिंह ने यह जानकारी देते हुए बताया कि प्राचार्य डा. संदीप गोयल के संरक्षण व डा. स्मृति कंबोज, डा. मंजू मेहता एवं डा. राजरानी के संयुक्त संयोजन में आयोजित इस कार्यशाला के समापन सत्र में महाविद्यालय के ध्येय गीत के गायन, माँ सरस्वती के समक्ष ज्योत प्रज्ज्वलन करने व छात्र उदयपाल द्वारा हरियाणवी लोक नृत्य की प्रस्तुति के उपरान्त इस कार्यशाला में दिल्ली के नैशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा व पुणे के फिल्म और टीवी संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त मास्टर ऑफ़ थिएटर सुविख्यात रंगकर्मी एवं नाट्य-निर्देशक कर्ण लढा से प्रशिक्षण प्राप्त विद्यार्थी कलाकारों ने ‘आवाज़’ नाटक का मंचन किया।

इस अवसर पर मुख्यातिथि के तौर पर अपने संबोधन में संस्कार भारती के अध्यक्ष रमेश दिनकर ने कहा कि मात्र पांच दिनों के प्रशिक्षण उपरान्त विद्यार्थी कलाकारों ने जिस भावना, संवेदना, मार्मिकता, राग-अनुराग और प्रणय इत्यादि भावों को समेटते हुए जिस परिपक्वता के साथ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है उसके लिए प्रशिक्षु कलाकार, ट्रेनर कर्ण लढा और आयोजक सभी बधाई के पात्र हैं। इस कार्यशाला में कर्ण लढा ने थिएटर कला सीखने के इच्छुक विद्यार्थियों को आंतरिक स्वः की प्रतिभा पहचान एवं खोज के आधार पर थिएटर में कल्पनाशीलता, अवलोकन, संवेद, व्याख्यान, हाव-भाव, भावना, संवाद संप्रेषणीयता इत्यादि के सैद्धांतिक एवं व्यवहारिक पक्षों से अवगत करवाते हुए प्रायौगिक स्तर पर ‘आवाज़’ नाटक के मंचन से उनकी मंचीय प्रतिभा को सभी उपस्थितजन के समक्ष प्रदर्शित करने का स्वर्णिम अवसर भी प्रदान किया। समापन सत्र में आयोजकों द्वारा प्रशिक्षु विद्यार्थी कलाकारों को प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन बीए तृतीय वर्ष के छात्र शिवा ने किया। इस अवसर पर संस्कार भारती के प्रांतीय प्रधान राम सिंह यादव, सदस्य जयंत शर्मा, महाविद्यालय के उप-प्राचार्य प्रो. हरजिंदर सिंह, डा. हरविंदर सिंह, डा. हरविंदर कौर, डा. कर्मजीत कौर, डा. दिनेश कुमार, डा. रमेश कुमार, प्रो. अमनदीप कौर, डा. सरोज रानी, डा. शोभा रानी, डा. पूनम सेतिया के अलावा विद्यार्थियों ने विशाल संख्या में अपनी उपस्थिति दर्ज़ करवाई।

