Home updates शास्त्र से शस्त्र के प्रतिरोध की वाहक है गुरु तेग बहादुर वाणी: सुरजीत सिरड़ी

शास्त्र से शस्त्र के प्रतिरोध की वाहक है गुरु तेग बहादुर वाणी: सुरजीत सिरड़ी

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सहयोग की अभिरुचि से ही हिन्द की चादर कहलाए गुरु तेग बहादुर जी: प्राचार्य प्रो. राम कुमार जांगड़ा
सिरसा: 7 अप्रैल:
श्री गुरु नानक देव जी द्वारा स्थापित सत्ता के ख़िलाफ़ शाब्दिक प्रतिरोध का प्रवचन गुरुबाणी का मूल स्वर है।

प्रतिरोध का यह प्रवचन प्रवाहित होता हुआ गुरु तेग बहादुर जी व गुरु गोबिंद सिंह जी तक तेग के प्रतिरोध का स्वरूप ग्रहण करता है। यह विचार राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, रूपवास के गणित प्राध्यापक, पंजाबी कवि, कथाकार एवं चिंतक सुरजीत सिंह सिरड़ी ने राजकीय महिला महाविद्यालय, सिरसा में श्री गुरु तेग बहादुर जी के प्रकाश-पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित व्याख्यान श्रृंखला के अंतिम दिन आयोजित विचार-गोष्ठी में मुख्य वक्ता के तौर पर अपने संबोधन में व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर वाणी भक्ति एवं शक्ति का ऐसा संगम है जो ज़ालिम के विरुद्ध पीड़ित का पक्षधर बनता है। उन्होंने गुरु तेग बहादुर वाणी को वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों के हनन के ख़िलाफ़ मानवाधिकारों के रक्षार्थ पथ-प्रदर्शक बताया। महाविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डा. हरविंदर सिंह ने यह जानकारी देते हुए बताया कि स्टाफ़ सचिव डा. हरविंदर सिंह व सांस्कृतिक समिति संयोजक डा. यादविंदर सिंह के संयोजन में संपन्न हुई इस विचार-गोष्ठी की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. राम कुमार जांगड़ा एवं वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य प्रो. यशपाल रोज ने की। विचार गोष्ठी का आगाज़ प्रो. यादविंदर सिंह व कीर्ति सोनी के सान्निध्य में कशिश खट्टर द्वारा श्री गुरु तेग बहादुर जी द्वारा रचित शब्द के गायन की प्रस्तुति से हुआ। डा. हरविंदर सिंह ने विचार गोष्ठी के मुख्य-वक्ता एवं मुख्यातिथि सुरजीत सिंह सिरड़ी का परिचय प्रदान करते हुए सभी उपस्थितजन स्वागत किया और विचार गोष्ठी की रूपरेखा से अवगत करवाया। अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य प्रो. राम कुमार जांगड़ा ने कहा कि धर्म का वास्तविक अर्थ सहयोग है। अपने धर्म का सम्मान करते हुए अन्य धर्मों को सहयोग प्रदान करने से ही महापुरुष पद प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी की इसी अभिरुचि एवं उन द्वारा प्रदत्त सहयोग के कारण ही उन्हें हिन्द की चादर के ख़िताब से नवाज़ा गया है। कार्यक्रम का संचालन डा. हरविंदर सिंह ने किया और डा. यादविंदर सिंह ने सभी उपस्थितजन के प्रति महाविद्यालय परिवार की ओर से आभार व्यक्त किया। विचार-गोष्ठी में महाविद्यालय की छात्राओं के अलावा प्रो. विक्रमजीत सिंह, डा. दलजीत सिंह, प्रो. मोनिका गिल, प्रो. अंकिता मोंगा, डा. रुपिंदर कौर, प्रो. संदीप झोरड़, प्रो. शिवानी, प्रो. किरण कालड़ा, डा. मनीषा गर्ग, प्रो. सविता दहिया, प्रो. निर्मला रानी, प्रो. कपिल कुमार सैनी, डा. सतपाल बेनीवाल, प्रो. मुकेश सुथार, प्रो. रितिका, प्रो. मीनू, प्रो. किरण, प्रो. अनु, पूजा सचदेवा, अंकुश मेहता, ललित कुमार, सुमित शर्मा, सोहन सिंह, विनोद कुमार इत्यादि ने अपनी उपस्थिति दर्ज़ करवाई।

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