बैठक में महान क्रांतिवीर करतार सिंह सराभा का किया स्मरण
प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस), सिरसा व पंजाबी लेखक सभा, सिरसा के संयुक्त तत्वावधान में 29 मई को प्रातः 10 बजे श्री युवक साहित्य सदन, सिरसा में
‘विमर्श, पुस्तक-लोकार्पण व काव्य गोष्ठी’ पर आधारित एक साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। प्रलेस सिरसा के सचिव सुरजीत सिरड़ी व पंजाबी लेखक सभा, सिरसा के सचिव डा. हरविंदर सिंह ने यह जानकारी देते हुए बताया कि यह निर्णय दोनों संगठनों के अध्यक्षों रमेश शास्त्री व परमानंद शास्त्री की संयुक्त अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। कार्यक्रम की शुरुआत कुलदीप सिरसा द्वारा एक साहित्यिक गीत के गायन से की जाएगी। बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार इस साहित्यिक कार्यक्रम को तीन चरणों में बांटा गया है। प्रथम चरण में ‘वर्तमान में लेखकीय जिम्मेदारियां’ विषय पर विमर्श का आयोजन किया
जाएगा जिसमें प्रो. हरभगवान चावला मुख्य वक्ता के तौर पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे। दूसरे चरण में युवा कवयित्री विर्क पुष्पिंदर के नव-प्रकाशित प्रथम पंजाबी काव्य-संग्रह ‘जेकर देखदी ना’ को लोकार्पित किया जाएगा। का. स्वर्ण सिंह विर्क इस काव्य-संग्रह की समीक्षा प्रस्तुत करेंगे। तीसरे चरण में दस युवा कवि-कवयित्रियों पर आधारित काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा जिसमें विर्क पुष्पिंदर, डा. आरती बांसल, डा. हरमीत कौर, छिंदर कौर सिरसा, रविंदर कौर सचदेवा, हरमन दिनेश, हीरा सिंह, वीरेंदर भाटिया, सुरेश बरनवाल व हरजीत सिंह देसू मलकाना द्वारा कविता पाठ किया जाएगा। आयोजकों ने सिरसा व आस-पास के क्षेत्रों के गणमान्यजन से इस साहित्यिक कार्यक्रम में अधिक से अधिक तादाद में बढ़-चढ़कर अपनी उपस्थिति दर्ज़ करवाने हेतु नम्र-निवेदन किया है। बैठक में अनीश कुमार, कुलवंत सिंह, नवनीत सिंह रेणु इत्यादि उपस्थित रहे। भारतीय स्वाधीनता संग्राम के महान क्रांतिवीर, ग़दर पार्टी के अहम जुझारू सिपहसलार व शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के आदर्श नायक शहीद करतार सिंह सराभा के जन्म दिवस के अवसर पर आयोजित इस बैठक में हरियाणा प्रगतिशील लेखक संघ के महासचिव, पंजाबी साहित्य अकादमी, लुधियाना के उपाध्यक्ष व केंदरी पंजाबी लेखक सभा (रजि.) के कार्यकारिणी सदस्य डा. हरविंदर सिंह सिरसा ने शहीद करतार सिंह सराभा के व्यक्तित्व, विचारधारा एवं कृतित्व के बारे में विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में शहीद करतार सिंह सराभा सरीखे क्रांतिवीरों की धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी विचारधारा एवं उनकी मानवतावादी जीवन शैली और भी उदाहरणीय, अनुकरणीय एवं प्रासंगिक हो गई है।

