सिनेमा मनोजरन के साथ साथ चिंतन का विषय भी है वर्तमान में पंजाबी सिनेमा में कई बदलाव देखने को मिले है क्योंकि पंजाबी सिनेमा कल्पना से दूर है और यथार्थ के करीब है
हास्य फिल्मो ने यहाँ मनोरजन खूब किया वही कुछ निर्देशकों ने हिम्मत जुटाई की पंजाबी सिनेमा के माद्यम से लोगो की बात की जाए । बल्कि समय के धरातल पर प्रशन पैदा किया जाए कि पंजाब की युवा पीढ़ी का क्या दर्द है कैसा जोश है और क्या दिशा है गीतकार जनाब अमरदीप सिंह गिल अपने गीतों के लिए हमेशा चर्चित व लोकप्रिय रहे है बल्कि पंजाब को अनेको गीत व लोकगायक दिए है परन्तु ये एक मुकाम नही था बल्कि अमरदीप सिंह गिल साहब के किरदार को देख कर ओर बदलते स्वरूप को देख कर लगता है जैसे वो एक कर्मयोगी बन कह रहा हो यात्रा ही मंजिल है
सिनेमा का सब्जेक्ट गिल साहब को हमेशा प्रिय ही रहा है बल्कि सिनेमा में नए प्रयोग करने का हौंसला ओर जज्बा नया इतिहास लिख रहा है। दिल से प्रेम के गीत लिखने वाले अमरदीप सिंह गिल साहब के दिमाग मे वर्तमान हालात की तस्वीर ने पंजाबी सिनेमा का शो मेन बना दिया दर्शक जब कोई फ़िल्म देखने जाते है तो हमेशा हीरो हीरोइन को ध्यान में रख कर सिनेमा देखने जाते है मगर जब हम ये सोच कर फ़िल्म की टिकट खरीदते है ये फ़िल्म अमरदीप सिंह गिल है तो सिनेमा का बदलता युग परदे पर नज़र आता है इसी बात ने अमरदीप सिंह गिल का वो सपना साकार किया जो फ़िल्म देखते वक्त वो देखा करते थे कब सिनेमा की स्क्रीन पर लिखा जाएगा “पटकथा लेखक व निर्देशक अमरदीप सिंह गिल”

जोरा दस .. फ़िल्म के डायलॉग आज भी दर्शकों की जुबान पर अब दस दिसम्बर को रिलीज हो रही “मरजाने” फिल्म जिसका अभी टेलर रिलीज हुआ है सिप्पी गिल कमलप्रीत सिंह कुल सिंधु आशीष दुग्गल विशेष भूमिका में है शिमला चंडीगढ़ राजस्थान क्षेत्र में शूटिंग पूरी हुई है आजकल इस फ़िल्म के डायलॉग भी चर्चा का विषय बने हुए है रियल स्क्रिप डायलॉग संगीत व निर्देशन के बल पर ही फ़िल्म दर्शको के मानसिक पटल पर दस्तक देती है डायलॉग सुन कर ऐसा लगता जैसे वर्तमान सवाल पैदा कर रहा है और फ़िल्म के बाद दर्शक चिंतन कर रहे है यही विशेषता है अमरदीप सिंह गिल साहब के सिनेमा कि
“जलते घर को देखने वालों फुस का छप्पड़ भी आपका है
आग के पीछे तेज हवा है आगे मुकद्दर आपका है
उसके कत्ल पर मैं चुप था मेरा नम्बर अब आया है
मेरे कत्ल पर आप चुप है अगला नम्बर आपका है”
दर्शक अपने जीवन के तीन घण्टे का वक्त देता है और निर्देशक लगभग एक वर्ष तब कही फ़िल्म बनती है
कल्पना परिकल्पना से परे ..फ़िल्म देखे और गर्व महसूस करे ये अमरदीप सिंह गिल साहब का सिनेमा है रियल सब्जेक्ट मरजाने का इंतज़ार 10 दिसम्बर
पूरी टीम को बधाई व शुभकामनाएं
ज़िन्दगी ज़िंदाबाद ।।

