प्रलेस ने किया शहीद ऊधम सिंह, प्रेमचंद व रफ़ी का स्मरण
सिरसा: 1 अगस्त:
प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) सिरसा के तत्वावधान में शहीद ऊधम सिंह बलिदान दिवस व मुंशी प्रेमचंद जयंती के उपलक्ष्य में स्थानीय राजकीय महिला महाविद्यालय में विचार-गोष्ठी एवं रचना-पाठ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रतिबद्ध मार्क्सवादी चिंतक का. स्वर्ण सिंह विर्क, राजकीय महिला महाविद्यालय, सिरसा के पूर्व इतिहास विभागाध्यक्ष डा. के के डूडी, राजकीय नैशनल महाविद्यालय, सिरसा के पूर्व इतिहास विभागाध्यक्ष डा. निर्मल सिंह, हरियाणा प्रगतिशील लेखक संघ के महासचिव डा. हरविंदर सिंह सिरसा व प्रलेस सिरसा के अध्यक्ष डा. गुरप्रीत सिंह सिंधरा पर आधारित अध्यक्षमंडल ने की। प्रलेस सिरसा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुरजीत सिरड़ी द्वारा उपस्थितजन के स्वागत उपरांत कार्यक्रम का शुभारंभ ईशनजोत कौर व जनक राज शर्मा द्वारा शहीद ऊधम सिंह से संबंधित इंकलाबी गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुति से हुआ। कार्यक्रम के पहले सत्र में डा. गुरप्रीत सिंह सिंधरा ने शहीद ऊधम सिंह के व्यक्तित्व, कृतित्व एवं विचारधारा से संबंधित अपने विस्तृत व्याख्यान में शहीद ऊधम सिंह के बारे में विस्तारपूर्वक अवगत करवाते हुए कहा कि उनके बलिदान को महज़ जलियाँवाला बाग हत्याकांड के प्रतिशोध तक सीमित कर नहीं आँका जा सकता बल्कि उनके द्वारा धर्मनिरपेक्ष समतापरक समाज के निर्माण के लिए गए सपने को पूरा किया जाना अभी बाकी है।

वर्तमान संदर्भ एवं मुंशी प्रेम चंद विषय पर अपने सारगर्भित व्याख्यान में प्रो. हर भगवान चावला ने मुंशी प्रेम चंद रचित साहित्य का विस्तृत अवलोकन प्रस्तुत करते हुए कहा कि उन द्वारा अपने सृजत साहित्य में रेखांकित सामाजिक, आर्थिक एवं राजसी विसंगतियां अभी भी मूँह बाए खड़ी हैं। उन्होंने मुंशी प्रेमचंद द्वारा प्रगतिशील लेखक संघ का गठन कर लेखकों को संगठित हो कर संघर्षरत रहने के लिए प्रेरित किए जाने को भी उनकी महत्त्वपूर्ण देन बताया। विचार-गोष्ठी के इस सत्र में का. स्वर्ण सिंह विर्क, डा. के के डूडी, डा. निर्मल सिंह, डा. हरविंदर सिंह सिरसा, गुरतेज सिंह बराड़ एडवोकेट, तिलक राज विनायक एडवोकेट ने भी शहीद ऊधम सिंह व मुंशी प्रेम चंद से संबंधित चर्चा को आगे बढ़ाते हुए उनके द्वारा प्रशस्त मार्ग को वर्तमान परिवेश में और भी प्रासंगिक बताया। वक्ताओं ने इस अवसर पर प्रख्यात गायक मोहम्मद रफ़ी का भी स्मरण किया।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में का. स्वर्ण सिंह विर्क, प्रो. हरभगवान चावला, डा. गुरप्रीत सिंह सिंधरा, डा. निर्मल सिंह, डा. हरविंदर सिंह सिरसा, रमेश शास्त्री, सुरजीत सिरड़ी, डा. शेर चंद, गुरतेज सिंह बराड़ एडवोकेट, तिलक राज विनायक एडवोकेट, पूरन सिंह निराला, मुख्त्यार सिंह चट्ठा, छिंदरपाल सिंह देओल, ईशनजोत कौर, जनक राज शर्मा, अमन कुमार इत्यादि ने सामाजिक सरोकारों, समसामयिक मसलों व ज्वलंत मुद्दों से संबंधित अपनी रचनाओं की भावपूर्ण एवं ख़ूबसूरत प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम का संचालन प्रलेस सिरसा के महासचिव डा. शेर चंद ने किया। इस अवसर पर मणिपुर हैवानियत, साहित्य अकादेमी पुरस्कारों से संबंधित सरकारी फ़तवे व हरियाणा सरकार द्वारा विभिन्न साहित्य अकादमियों के कम किए रुतबे के विरोध स्वरूप प्रस्ताव भी पारित किए गए।
कार्यक्रम के अंत में प्रगतिवादी पंजाबी लेखक हरभजन सिंह हुंदल, सिरसा के प्रसिद्ध पंजाबी लेखक डा. जी डी चौधरी, पंजाबी कथाकार अशोक वशिष्ठ, गायक सुरिंदर छिंदा, वरिष्ठ पंजाबी लेखक सुरिंदर रामपुरी की धर्मपत्नी, पंजाबी साहित्य अकादमी, दिल्ली के पूर्व सचिव गुरभेज सिंह गुराया की बहन व प्रलेस सिरसा एवं पंजाबी लेखक सभा सिरसा के वरिष्ठ सदस्य अनीश कुमार की भाभी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए मौन रखकर उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

