हिंदी फिल्म जगत की सब से मशहूर और उम्दा कलाकार अभिनेत्री सुरेखा सीकरी के हृदयाघात से निधन पर सभी कलाकारों में गम की चादर छाई हुई है। सभी एक स्वर में इस बात को मान रहे हैं की ये अभिनय क्षेत्र में एक बहुत बड़ी क्षति है जो निकट भविष्य में जल्दी ही पूरी नहीं हो पाएगी।
हरियाणा के सब से पहली फिल्म बहुरानी के निर्माता निर्देशक अरविंद स्वामी का कहना है की इस तरह की जबरदस्त अभिनेत्री कोई युगों में एक ही पैदा होती है। वे अभिनय के साथ साथ स्वभाव में भी बहुत ही हंसमुख और संवेदन शील थी। सदा जीवन और उच्च विचार उनकी सोच थी। उनके साथी बॉलीवुड के ही एक जबरदस्त अभिनेता पानीपत के राजेंद्र गुप्ता कहते हैं की ये उनके लिए एक व्यक्तिगत क्षति है। वे राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की इनकी साथी थी और अनेकों नाटकों में उन्होंने उनके साथ अभिनय किया था। उन दोनो का शुरू शुरू का नाटक देवयानी का कहना है बहुत ही चर्चित हुआ था। सुप्वा रोहतक के डीन जितेंद्र जीतू ने इसे बॉलीवुड की बहुत ही बड़ी क्षति माना।
जीतू ने श्रद्धांजलि देते हुई माना की इस नुकसान को जल्दी से भूल पाना असम्भव है। मनोहर सिंह के साथ किए उनके नाटक आधे अधूरे को आज भी मिल का पत्थर माना जाता है।
एम डी यू के युवा कल्याण विभाग के निदेशक जगबीर राठी ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा की ऐसे कलाकार सदियों में ही कोई एक आता है और अपनी अमित छाप छोड़ जाता है। हरियाणा के वरिष्ठ रंगकर्मी विश्व दीपक त्रिखा ने कहा कि उन्ही ने सत्तर के दशक में एन एस डी की रिपेरटरी के बहुत से नाटक देखे थे और तकरीबन सभी नाटकों में वे और उत्तरा बावकर मुख्य भूमिका में होती थी। उनका कहना है की उनका अभिनय का स्तर देख कर उन्हे हैरानी हुई थी तब की अभिनय इतना स्वाभाविक भी ही सकता है। बधाई हो फिल्म में उनके अभिनय के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया था और सुरेखा सीकरी ने खुद माना था की उनकी दूसरी पारी की शुरुआत अब हुई है।त्रिखा ने माना की ये अभिनय जगत की बहुत बड़ी क्षति है और ऐसी ही जानदार अभिनेत्री दोबारा जल्दी से फिल्म जगत को नही मिलेगी
यशबाबू एंटरटेनमेन के निदेशक एवं विख्यात फिल्म निर्माता निर्देशक श्री राजेंद्र वर्मा यशबाबु ने शोक प्रकट करते हुए कहा की बधाई हो फिल्म से उनकी दूसरी पारी शुरू ही हुई थी की काल के क्रूर हाथों ने उन्हे हमसे छीन लिया। एक बेहतरीन कलाकार हमे छोड़ कर चला गया है। वे अभिनय का एक चलता फिरता स्कूल थीं।



