जीएनसी सिरसा में हुआ कविता पाठ, विचार गोष्ठी व सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन

युग कवि पाश जयंती के अवसर पर हुआ आयोजन

सिरसा: 9 सितंबर:
पाश की कविता की मुखरता, प्रखरता और उसमें प्रस्तुत प्रतिरोध के स्वर की प्रासंगिकता वर्तमान परिप्रेक्ष्य में और भी ज़्यादा हो गई है। विद्रोह, प्रतिरोध का स्वर पाश-काव्य का प्रतिनिधि स्वर है। इस स्वर और इसके विलक्षण काव्य-सौंदर्य बोध ने पाश-काव्य को विलक्षण एवं विराट आयाम प्रदान किए हैं। यह विचार अंतरराष्ट्रीय ख्यातिनाम जनकवि पाश के जन्मदिवस पर राजकीय नैशनल महाविद्यालय, सिरसा में पंजाबी साहित्य सभा के तत्वावधान में आयोजित ‘कविता पाठ, विचार गोष्ठी व सांस्कृतिक कार्यक्रम’ में अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्षमंडल के सदस्य, प्रख्यात लेखक एवं चिंतक का. स्वर्ण सिंह विर्क ने मुख्य वक्ता के तौर पर अपने संबोधन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि पाश की कविता सौंदर्य बोध व प्रतिरोध के स्वर का विलक्षण सम्मिश्रण है। का. विर्क ने कहा कि आमजन को ज़ुबाँ प्रदान करने वाले पाश-काव्य से पंजाबी कविता को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिली है।

महाविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डा. हरविंदर सिंह ने यह जानकारी देते हुए बताया कि पंजाबी साहित्य सभा की संयोजक डा. हरविंदर कौर. व डा. लखवीर सिंह के संयोजन में आयोजित इस आयोजन की अध्यक्षता प्राचार्य डा. संदीप गोयल ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में डा. संदीप गोयल ने उपस्थितजन का आह्वान किया कि वह पाश सरीखे कवियों-चिंतकों का गहन अध्ययन करते हुए अपने जीवन अनुभव को व्यापक बनाएं। उन्होंने ऐसे सृजनात्मक आयोजन हेतु आयोजकों के प्रति साधुवाद व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यार्थियों की सूझ समझ को तीक्ष्णता एवं गहनता प्रदान करने में ऐसे आयोजनों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम के प्रारंभ में डा. हरविंदर कौर द्वारा कार्यक्रम की रूपरेखा से अवगत करवाने, अतिथियों का स्वागत व उनका परिचय प्रदान किए जाने के उपरान्त कार्यक्रम का शुभारंभ प्रतिबद्ध शिक्षक, प्रगतिशील गीतकार एवं गायक कुलदीप सिरसा द्वारा एक इंकलाबी गीत की प्रस्तुति से हुआ। तीन सत्रों में आयोजित इस कार्यक्रम के पहले सत्र में महाविद्यालय के विद्यार्थियों मनदीप कौर, रमनप्रीत कौर, मुस्कान, सिमरन, अंजू, एकता, देश राज, साहिल, जश्न एवं लक्शप्रताप सिंह ने पाश द्वारा व पाश बारे लिखी गई कविताओं व गीतों की प्रस्तुति दी। दूसरे सत्र में का. स्वर्ण सिंह विर्क ने पाश के जीवन, रचना, रचना दृष्टि व विचारधारा को व्याख्यायित करते एक फलप्रद, भावपूर्ण एवं विचारोत्तेजक व्याख्यान की प्रस्तुति दी। तीसरे सत्र में कुलदीप सिरसा ने प्रति-संस्कृति को सृजित करते सामाजिक सरोकारों से सराबोर एवं ज्वलंत मुद्दों पर आधारित गीतों की खूबसूरत प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के समापन अवसर पर अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय सचिवमंडल के सदस्य एवं पंजाबी विभागाध्यक्ष डा. हरविंदर सिंह अतिथिगण एवं उपस्थितजन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में अपनी बनती भूमिका निर्धारित करने में पाश की कविता एक प्रकाशस्तंभ की भूमिका निर्वहन करने में सक्षम है अतः पाश काव्य का पठन, चिंतन एवं मनन अनिवार्य है। कार्यक्रम का संचालन पंजाबी साहित्य सभा की अध्यक्ष मनदीप कौर व सचिव रमनप्रीत कौर ने किया। इस अवसर पर जगरूप सिंह चौबुर्जा, प्रो. हरजिंदर सिंह, डा. बलदेव सिंह, डा. अनीता मड़िया, डा. सत्यपॉल, डा. मीत, प्रो. राजविंदर कौर, डा. राम कुमार, डा. कर्मजीत कौर, डा. मनदीप कौर, डा. पूनम सेतिया, डा. शोभा के अलावा महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने विशाल संख्या में अपनी उपस्थिति दर्ज़ करवाई।

