Home News Point जीएनसी सिरसा के पंजाबी विभाग द्वारा डा. सुभाष मानसा को श्रद्धांजलि अर्पित

जीएनसी सिरसा के पंजाबी विभाग द्वारा डा. सुभाष मानसा को श्रद्धांजलि अर्पित

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सिरसा: 2 जनवरी:
राजकीय नैशनल महाविद्यालय, सिरसा के स्नातकोत्तर पंजाबी विभाग की ओर से आयोजित बैठक में अपने पूर्व विभागाध्यक्ष और उच्चतर शिक्षा विभाग, हरियाणा से सेवानिवृत्त पंजाबी प्राध्यापक डा. सुभाष मानसा के आकस्मिक असामयिक निधन पर गहन शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजली दी गई। पंजाबी विभागाध्यक्ष डा. हरविंदर सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस बैठक में पंजाबी विभाग के स्टाफ़ सदस्यों डा. हरविंदर कौर, डा. अनीता मड़िया, डा. लखवीर सिंह, अमनदीप कौर व पंजाबी विभाग से संबंधित विद्यार्थियों ने दो मिनट का मौन धारण कर डा. सुभाष मानसा के प्रति अपने श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। इस अवसर पर पंजाबी विभागाध्यक्ष, अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) के राष्ट्रीय सचिवमंडल सदस्य एवं प्रलेस हरियाणा राज्य इकाई के महासचिव डा. हरविंदर सिंह ने डा. सुभाष मानसा का स्मरण करते हुए कहा कि पंजाब के मानसा में पैदा हुए सुभाष मानसा ने पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के पंजाबी विभाग से एमए व पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने के पश्चात एमएम कॉलेज, फतेहाबाद में कुछ समय तक पंजाबी प्राध्यापक के तौर पर अपनी सेवाएं प्रदान कीं। इसके पश्चात उच्चतर शिक्षा विभाग, हरियाणा में प्राध्यापक पद पर कार्यभार ग्रहण करते हुए डा. सुभाष मानसा ने हरियाणा के राजकीय महाविद्यालयों में लंबे अंतराल तक अपनी सेवाएं प्रदान करने के दौरान राजकीय नैशनल महाविद्यालय, सिरसा में पंजाबी प्राध्यापक और पंजाबी विभागाध्यक्ष के तौर पर भी अपनी ज़िम्मेवारी का बाख़ूबी निर्वहन किया। इंदिरा गाँधी राजकीय महाविद्यालय, टोहाना से सेवानिवृत होने के उपरान्त डा. सुभाष मानसा कुछ देर तक टोहाना के दुर्गा महाविद्यालय व डिफेन्स कॉलेज में प्राचार्य के तौर पर भी कार्यरत रहे। टोहाना को अपनी कर्मस्थली व यहीं अपना स्थाई निवास बनाते हुए डा. सुभाष मानसा ने हरियाणा में पंजाबी भाषा, साहित्य एवं सभ्याचार को विकसित, प्रचारित-प्रसारित व प्रफुल्लित करने में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान किया। डा. सुभाष मानसा ने एक प्रतिबद्ध शिक्षक एवं सजग शिक्षविद के तौर पर अपनी विलक्षण पहचान बनाई और एक मार्क्सवादी चिंतक के तौर पर चिंतन और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय होते हुए हरियाणा में प्रगतिशील साहित्यिक तथा सांस्कृतिक आंदोलन को संगठित व मज़बूती प्रदान करने में उदाहरणीय एवं अनुकरणीय भूमिका का निर्वहन किया। अपने जीवन के अंतिम काल में वह अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) के केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य व हरियाणा राज्य इकाई के अध्यक्ष पद पर अपनी महत्त्वपूर्ण ज़िम्मेवारी का सक्रियता से निर्वहन कर रहे थे। डा. हरविंदर सिंह ने कहा कि डा. सुभाष मानसा ने स्थानीय, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के ख्यातिनाम लेखकों, चिंतकों, दार्शनिकों, इतिहासविदों व समाजशास्त्रियों के लेखन का अध्ययन-मनन करते हुए अपने आप को सदैव वैश्विक नवीनतम ज्ञान से जोड़े रखा। मार्क्सवादी चिंतक, प्रतिबद्ध शिक्षक, प्रबुद्ध शिक्षाविद, ओजस्वी वक्ता एवं सुह्रदय व्यक्तित्व डा. सुभाष मानसा को ज्ञान का बहता हुआ दरिया बताते हुए डा. हरविंदर सिंह ने कहा कि डा. सुभाष मानसा के निधन से हरियाणा में पंजाबी भाषा, सभ्याचार, साहित्य के क्षेत्र के साथ साथ प्रगतिशील चिंतन, लेखन, प्रगतिशील साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आंदोलन की जो क्षति हुई है वह अपूरणीय है। बैठक में डा. हरविंदर सिंह, डा. हरविंदर कौर, डा. अनीता मड़िया, डा. लखवीर सिंह व डा. अमनदीप कौर ने डा.सुभाष मानसा के असामयिक आकस्मिक निधन पर उनके पारिवारिक सदस्यों, साथी-स्नेहियों एवं प्रशंसकों के प्रति हार्दिक सहानुभूति एवं गहन शोक संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि डा. सुभाष मानसा द्वारा पंजाबी भाषा, साहित्य, सभ्याचार, प्रगतिशील चिंतन, लेखन, प्रगतिशील साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आंदोलन के क्षेत्र में प्रदत्त विलक्षण योगदान हेतु उनकी स्मृति सदैव बनी रहेगी।

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