#युद्ध का पांचवा दिन:-
वो युद्ध सबसे मुश्किल होता है जिसमे अदृश्य दुश्मन हो किस तरफ से वार हो क्या पता योद्धा बहुत से तरीके अपनाते है तलवार से विचार से रण नीति से फिर समाधान निकलता है गर्व ओर सम्मान की बात है और ये देश की परम्परा है कि हर कोई निकल पड़ता है जब संकट का समय हो सुई आपना फर्ज निभाती है और तलवार आपने तरीके से चलती है हर किसी का अपना तरीका है पर भाव एक ही होता है की युद्ध हर हाल में जीता जाए लेकिन इस वक्त हम किसी मैदान में युद्ध नही लड़ रहे बल्कि मैदान है हमारा घर और योद्धा है मन आज बहुत से यन्त्र है हमारे हाथों में ….
मगर हमे नही भूलना चाहिए महान गुरुओ के बलिदान की अमर गाथाओ को कैसे वो कई कई महीने बिना भोजन के युद्ध लड़ गए हमारे पास तो मात्र 21 दिन का समय और सब सुविधाओं के साथ घर पर ही रहना है समय सीमा बढ़ भी सकती है मगर हौसला बढ़ा होना चाहिए घर बैठे कर हम समाज के लिए क्या कर सकते है कम और हल्का खाना चाहिए आपने हिस्से का कुछ भोजन किसी जरूरतमंद को अर्पित करना चाहिए भजन अरदास योग मौन ज़रूरी तो है ही बल्कि अगर आप मे कोई प्रतिभा है उसे ऑनलाइन के माद्यम से सांझा कर सकते है सारा दिन कोरोना की नही बल्कि करुणा की चर्चा करे बच्चो को देशभक्तो की कथा सुनाए सोशल दूरी बनाए रखे परिवार में माहौल को खुशगवार बनाये बहुत से मित्र समाज सेवा कर रहे और शिक्षक साथी ऑनलाइन शिक्षा दे रहे कोई सकारात्मक विचार दे रहा है सब आपना अमूल्य योगदान दे रहे बस सतर्क रहकर कम से कम लोग बाहर निकले घर पर रहे प्रशासन का सहयोग करे अफवाहों पर ध्यान न दे वीडयो Sms व वायरल करते समय जागरूक रहे ओर सबसे जरूरी आत्मबल की हम ये जंग जरूर जीतेंगे… हम ही जीतेंगे दुनिया ।।
ज़िन्दगी ज़िंदाबाद ।।

