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रंगमंच का अनूठा किरदार स्व विनोद धमीजा

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कलाकार की कला का आकार बहुत बड़ा होता है जो ज़िन्दगी के बाद भी आने वाली पीढ़ी को संस्कार देता है प्रेरणा देता है आपने आप मे एक संस्था हो जाना जीवन को दर्पण बना देना और सामाजिक व कला के लिए अमूल्य समय देना आपने आप मे बहुत बड़ी बात और दूसरों के लिए उदहारण होता है तभी ज़िन्दगी ज़िंदाबाद होती है ऐसा ही एक किरदार हमारा विनोद भाई जब आपना किरदार निभा कर चल दिया तो उसके कदमो के निशान व उसकी कला रूपी यात्रा हम सब के लिए प्रेरणादायक बन गई और उनका जीवन प्रेरणास्रोत ओर ज़िन्दगी जिंदाबाद हो गई दिन महीनों में ओर महीने साल में बदल जाएंगे परिवर्तन संसार का नियम भी है मगर हर साल कैलन्डर की आज की तारीख मस्त कलन्दर की याद दिलाएगी क्योकि

कतरा मिला समुंदर से समुंदर हो गया 
आशिक मिला मौत से कलन्दर हो गया 
आपके किरदार आपके खूबसूरत रंग व काव्यभाव अभिनय शैली और होठो की सच्चाई सदैव एक कविता गीत गजल व कहानी बन कर हमारे मानसिकपटल पर दस्तक देती रहेगी और हम श्रद्धा के साथ नम आंखों से नमन करते रहेंगे विनोद भाई को शत शत नमन …
कहानी कुछ इस तरह से है 
लम्हा लम्हा सी जिंदगी के कुछ लम्हे  बहुत से रंगों से मिल कर इन्द्रधनुष बनाते है यादों के  पर्दे के पीछे या फिर पर्दे पर मंच के गर्भ से जन्म लेता है कोई किरदार  कान पे रखा पैन उतार कर जीवन की बही खाते पे  
बे हिसाब  बने उंसके चित्र ओर जीवनरेखा की रस्सी पे कल्पनाओं की शायरी या फिर रामायण के किसी पात्र से झलकते उंसके चहेरे के भाव  राम की लीला से कम नही है बेशक आज के ही दिन विनोद भाई हम सब को अलविदा कह के रुखसत हो गए पर हम कभी भी अलविदा नही कहेंगे हम जब भी उंसके चित्र ओर कला रूपी अमिट चरित्र को देखते है तो ऐसा लगता है 
जैसे वो मुस्करा कर कह रहा हो ….

“ज़िन्दगी तू यही कही रुक …..
मै जरा किरदार बदल कर आता हूँ…

SHOW MUST GO ..On … ज़िन्दगी ज़िंदाबाद  Sanjivv Shaad

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