आप………?
पहले मैं
आपके लिए सिर्फ आप था
फिर तुमने मुझे तुम कहा
और इक दिन
तुम से तू तक आ गए
देखा पहले तो सिर्फ तुम जानते थे
और आज
पहचानने लगे हो…….. इसलिए
कभी कभी सोचता हूँ
रंग
से रूप
और
फिर
रूप से जिस्म से घर संसार
धीरे धीरे
महोब्बत भी चोंका चुल्ला हो जाती है
वरना सारी उम्र अधूरी ही रहती है
सिर्फ
आप बन कर ……….?
आप……
आप………?
पहले मैं
आपके लिए सिर्फ आप था
फिर तुमने मुझे तुम कहा
और इक दिन
तुम से तू तक आ गए
देखा पहले तो सिर्फ तुम जानते थे
और आज
पहचानने लगे हो…….. इसलिए
कभी कभी सोचता हूँ
रंग
से रूप
और
फिर
रूप से जिस्म से घर संसार
धीरे धीरे
महोब्बत भी चोंका चुल्ला हो जाती है
वरना सारी उम्र अधूरी ही रहती है
सिर्फ
आप बन कर ……….?
Check Also
खेलकूद से पैदा होती है अनुशासन की भावना: डा. संदीप गोयल
जीएनसी सिरसा में नैशनल स्पोर्ट्स डे पर हुआ आयोजन सिरसा: 29 अगस्त: व्यक्तित्व के सर्वांगीण …

