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ओशो

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तुम्ही तुम हो…
मैंने सुना है : डिप्रेशन से ग्रस्त व्यक्ति एक बड़े डाक्टर के पास गया| 
डाक्टर ने उसकी जांच की और पाया कि उसे कुछ भी नहीं है | डाक्टर बोला, मुझे तुम्हारे शरीर में कुछ भी गलत दिखाई नहीं पड़ता, और मैं तुम्हें किसी दवा का सुझाव नहीं दूँगा | 
बल्कि शहर में एक प्रसिद्ध कॉमेडियन ग्रिमाल्डी का कॉमेडी शो हो रहा है, तुम वह देखने चले जाओ| कॉमेडी शो में जी भर के हंसो| यदि तुम हंस सको तो तुम्हारी सारी उदासी, सारा विषाद, सारा डिप्रेशन गायब हो जाएगा| और उसका असर तुम पर किसी भी दवा से ज्यादा गहरा होगा क्योंकि तुम्हारे शरीर में कुछ भी गलत नहीं है |
तुम केवल एक चीज भूल गए हो, और वह यह है कि कैसे हंसा जाए | तुम हंसने की भाषा ही भूल गए हो|और वह यह कि कैसे हंसा जाए | तुम्हें यह भाषा फिर से सीखनी  होगी|
तुम्हें किसी उपचार की जरूरत नहीं है | बस ग्रिमाल्डी के शो में जाओ और हंसों | 
वह व्यक्ति बोला,  “अरे मैं ही तो ग्रिमाल्डी हूं”|
तुम्हारे साथ भी ऐसा ही किस्सा है | तुम अपना परिचय भूल गए हो | तुम ही तुम हो  तुम परमात्मा हो|
ओशो.

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