आज दिन भर में तूफान की खबरे ओर तरह तरह के मज़ाक पढ़ने को मिले …सच मे चाँद किसी के लिए मामा है किसी के लिए महबूब ओर किसी के लिए …रोटी लगता है
सोचने का विषय है कुदरत की ये हालत कैसे हुई ओर आने वाला कल कैसा होगा सल्फी के दौर में ओरिजनल फोटो को भूल ही गए ….ये तूफान गुजर जाये किसी का कोई नुकसान न संसार के किसी भी कोने मे सब तरफ सुख शांति हो आओ कुदरत के इस प्रशन पर चिंतन करे चिंता नही क्योकि ये दौर भी गुजर जाएगा आने वाला वक्त कैसा होगा क्योंकि हमारे बच्चे ही भविष्य में बड़े होंगे ….काश कोई तूफान न आये ….
कुदरत में संतुलन हो हर चहेरे पे मुस्कान हो कुदरत के साथ मजाक न हो नही तो कुदरत का मज़ाक बहुत महंगा पड़ेगा ….. ओर इस धरा पर अनेको जीव है पंछी है पेड़ पौधे भी है और…….. मानव भी है ….
जब आखरी पेड़ गिर जाएगा आखरी नदी सुख जाएगी और आखरी मछली मर जाएगी तो जेब मे पड़ा रुपया पैसा किसी भी काम नही आएगा …..
ओर देखने वाली बात तो ये है कितितलियों के पँखो पर छपे रंगों के हुनर को देख कर लगता है तू किसी को सजाने में कोई कसर नही छोड़ता …
कितने रंग कितनी परिकल्पना
फूल फल झरने नदिया सागर दरिया ओर मौसम सूरज चांद तारे ओर कुदरत के नजारे
कितनी सुंदर कायनात है ये कौन चित्रकार है
बुरे से बुरा भी आपने लिए अच्छा ही सोचता है…ये जो है ज़िन्दगी ..

