सारा दिन मै वो नहीं होता
जो मै हूँ
और थक हार के चारपाई पे लेटता हूँ
और
सोचता हूँ की तब मै
वो नहीं होता जो सारा दिन होता हूँ ।।
तो फिर
मै कोन सा
sanjiv shaad हूँ।
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