Home updates युद्ध ..जीवन मे अहम भूमिका निभाते है

युद्ध ..जीवन मे अहम भूमिका निभाते है

12 second read
0
0
10

ज़िन्दगी के सफर जो पल आज हम देखने को मिल रहे शायद हमने कभी सोचे न थे सब मस्त थे बे फिक्र अपने अपने जीने के तौर तरीकों में  चार महीने पहले दस्तक दी  इस महामारी ने आदमी आदमी से दूर हो गया ऐसा लग जैसे मोबाइल की टच स्क्रीन टूट गई हो चेहरे पे नकाब आ गया हाथ मिलाने से गए रेल जहाज बस कर सब रुक गई ज़िन्दगी थम सी गई नया शब्द पहली बार जीवन मे आया लॉक डाउन घर मे रहने को मजबूर आदमी ओर पशु पक्षी उड़ने के लिए आजाद आसमान साफ नजर आने लगे कहते है जलंधर शहर से पहाड़ दिखने लगे लोग ऑन लाइन मिलने लगे पढ़ने लगे शक बढ़ने लगा आदमी के द्बारा बनाये भगवान के दरवाजे भी बंद हो गए 

लोगों को बताया गया अब हम सयंम से जीतेंगे ये जंग क्योकि साधन बहुत कम थे शायद देश मे देश मे था तो सिर्फ सयंम सहयोग और आत्मबल हमे याद दिलाया गया हम उस देश के वासी है जिस देश मे गंगा बहती है लगते हाथ गंगा भी साफ हो गई नही तो इसको साफ करने के लिए कितने आपने हाथ धो जाते पूरे देश ने थाली बजाई दीये जलाए पुलिस ने डंडा भी चलाया हम में से ज्यादतर इसलिये भी पिटे गए क्योकि हम देखना चाहते थे कि बाहर क्या हो रहा सेकड़ो की संख्या में लोकडाउन किया गया हजारो में खोलना शुरू कर दिया गया पासपोर्ट के चक्कर मे राशनकार्ड दर ब दर हो गये नंगे पांव घर की ओर निकले मजलूम लोग रेलगाड़ी के नीचे कट गए  पुलिस नाकों पर पकड़े गए  गीत बने कहानियां बनी लोग लोगो का सहारा बने 
लोगों के द्वारा लोगों के लिए चुने हुए लोग ऑन लाइन दर्शन दे कर ही आपना कर्तव्य पूरा कर गए सरकारी तंत्र ने सामाजिक संस्थओं की पीठ पर ही नैया पार करने की सोची ओर लोग सोचते रहे राशन अब आया अब आया जो शराब घर की अर्थव्यवस्था खराब कर देती थी आखिर वो सरकार की अर्थव्यवस्था का सहारा बनी शराबी भी गर्व के साथ कहने लगे हम इसिलए पीते है क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था का सवाल है सिर्फ भाषण न रोटी न राशन देश इस समय संकट से गुजर रहा है और देशवासी  सतर्क है  क्योंकि हमारे पास सयंम है सहयोग है जागरूकता है और एक ही इलाज है घर मे रहना होगा बाजार लेफ्ट राइट के चक्कर मे उलझ गए पुलिस चलान करके यातायात के नियम को ठीक करने में लग गई सड़क दुर्घटनाओं में कमी आई यातायात बिना चले ही ठीक हो गया लोगों जे घरो में खड़े वाहनों की बैटरी जबाव दे गई साईकल की सवारी ने जोर पकड़ लिया हमारी संयम सीमा चरम पर पहुंच गई ये तस्वीर का दूसरा पहलू है सबसे ज्यादा संयम हमारे विद्यार्थो में दिखाई दिया जिनके हाथो में मोबाइल आ गए क्योकि जब भी वो मोबाइल उठाते थे तो उन्हें सुनने को मिलता था सारा सारा दिन मोबाइल… पढ़ो कभी किताबे भी खोल लो…अब बच्चा मोबाइल खोलता है तो माता पिता को गर्व होता है  
ज़िन्दगी बदल रही है हमे भी बदलना होगा  सच मे सयंम से ही जंग पर काबू पाना  होगा क्योंकि हमारे पास संयम ही है सतोष धन है  और घर है 
पता सब को ही होता है कैसे क्यो किसलिए सब के पास है  बस सतर्क रहने की जरूरत है शिक्षा और स्वस्थ सेवा को मजबूत करने की जरूरत है
क्योकि ये वायरस तो एक दस्तक है शुरुआत है शायद ये हम जीत भी जाये मगर खतरे बढेगे देशों के बीच होने वाले युद्ध तरीके बढेगे संयम के साथ संयम से दुनिया से चार कदम आगे रहना होगा क्योंकि हमे आत्मनिर्भर भी बनना है सक्षम बनना है इस जंग के बाद एक ओर बड़ी जंग लड़नी है क्योंकि जंग खत्म नही होती बल्कि एक ओर जंग को जन्म देती है आने वाली नस्लों में भी संयम रहे हम सब ने उनके लिए भी वातावरण तैयार करना है शुक्र है ये कोई कुदरती आपदा नही है अभी पानी हवा आग मिट्टी आसमान पांचों तत्व हमारे साथ है मगर पांच तत्व से बना शरीर खतरे में है  ….बहुत से वायरस हम सब के बीच है और हम रह रहे है शायद इसी वायरस के साथ जीना होगा आगे बढ़ना होगा  और कहना होगा ऐसा हमने सोचा न था 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

खेलकूद से पैदा होती है अनुशासन की भावना: डा. संदीप गोयल

जीएनसी सिरसा में नैशनल स्पोर्ट्स डे पर हुआ आयोजन सिरसा: 29 अगस्त: व्यक्तित्व के सर्वांगीण …