मैं बाहर से चुप हुआ हूँ अंदर मेरे बहुत कुछ चल रहा है खतरनाक होता है अंदर ही अंदर कुछ न कुछ चलना किसी का बोलना बन्द हो सकता है सोचना नही कौन क्या सोच रहा बस ये ही पता नही चलता लेकिन जब अंदर की सुनी जाती है तो सही राह मिलती है जिसे दिल की आवाज कहते है तुमने यही कहा है न जरा दिल पर हाथ रख कर कहो… क्योकि हाथ दिल पर रखा जाता है दिमाग पर नही लेकिन दिमाग और दिल की बहुत दूरी है दिमाग जो सोचता है उसे दिल कहने की गवाही नही देता … इसलिए दिल के पास दिमाग नही होता और दिमाग के पास दिल नही होता ..कुल मिलाकर कर सभी सवालों के हल खुद के पास ही होते तस्सली के लिए कुछ लोग कहते है सुन लो बाकी जो दिल कहे वो कर लेना…कभी आपने आप से भी पूछ लेना चाहिए
बहुत से सवाल फालतू होते है हमारे पास लोगो के लिए …जिनका कोई जबाव नही होता हर किसी के पास बस सवाल है जो दूसरा सवाल को जन्म देता है जितना भी कुछ हो रहा है बस अंदर की सोच के कारण होता है क्योंकि दुनिया से कम हम खुद में ज्यादा बोलते है बस जरा चुप हो कर देखिये…Shaad


Dr Sukhpal
May 15, 2020 at 3:19 am
Good
Dr Sukhpal
May 15, 2020 at 3:19 am
Good