फ़िल्म समीक्षा:-
रंगमंच के की अपार सफलता के बाद स्क्रीन की ओर उठा नाट्यम ग्रुप का पहला कदम zero164
_नाट्यम थियेटर ग्रुप बढ़ा रंग मंच से फिल्म की तरफ, लाए अपनी पहली शार्ट फिल्म_
पंजाब का नाट्यम थियेटर ग्रुप पिछले लंबे समय से रंगमंच के माध्यम से तो विभिन्न सामाजिक मसलों पर सूबे व बाहर के लोगों को जागरूक करते हुए मनोरंजन के साथ साथ उनकी सोच को झंझोरने का काम करता आ रहा है। उसी श्रंखला को आगे बढ़ाते हुए इस बार नाट्यम द्वारा अपनी पहली शार्ट फिल्म जीरो164 को पॉकेट फिल्म्स व नाट्यम एन्टरटेनमैंट के बैनर तले दर्शको के आगे पेश किया गया है। रंगमंच हो चाहे फिल्म, नाट्यम अपनी सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति हमेशा सुदृढ़ता और इमानदारी से खड़ा आ रहा है। लिहाज़ा हिंदी भाषा में बनाई गई यह फिल्म भी एक शानदार प्रस्तुति है। आईए इसके अलग अलग पहलुओं के बारे चर्चा करते है-
*कहानी-*
नाट्यम की फिल्म जीरो164 आज़ादी के महांनायक शहीदे -ऐ -आजम स. भगत सिंह की विचारधारा से प्रभावित एक नौजवान की कहानी है। जिसमे दीप नाम का एक युवक जो अपनी छोटी सी टीम के साथ शौंक से नाटक निर्देशक है और हक सच के लिए दिलेरी के साथ लड़ता आ रहा है। इसी दौरान एक शाम उसकी ज़िंदगी में कुछ ऐसा होता है कि परस्थिति उसे एक ऐसे चौराहे पर लाकर खड़ा कर देती है जब उसे अपनी ज़िंदगी व विचारधारा में से किसी एक को चुनना होता है तो वो किस तरह उन हालातों से पेश आता है? उसे किस कदर शहीद भगत सिंह की विचारधारा सवाल करती है? और वो कौनसा रास्ता अपनाता है यही है इस फिल्म की कहानी है।
*अदाकारी-*
इस फिल्म की प्रोडक्शन में सिनेमा जगत की प्रमुख हस्तियाँ शामिल है जिसमें पंजाब का मशहूर गायक व अदाकार निशावन भुल्लर बेजड़ संजीदा तरीके से निभाए अपने रोल व दमदार अदाकारी से देखने वाले को हैरान करता है। उसी के साथ भगत सिंह की वेशभूषा में सजा रवनीत जब संवाद बोलता है तो रौंगटे खड़े कर देता है। उनके साथ साथ बाकी के सभी अदाकार जो नाटिअम और रंगमंच के साथ जुड़े हुए कलाकार हैं उनका काम भी प्रशंसनीय है। फिल्म में स्थापित मंच संचालक एवं अदाकार संजीव शाद मुख्य किरदार के पिता का रोल निभा रहे है जबकि मां के रूप में उनका साथ निभाया है मनजीत मनी ने; दोनों ने ह्रदय पसीजने वाली अदाकारी की है। उन सभी के साथ नाटिअम के सीनियर अदाकार डा. जगदीप संधू, गगनदीप सिंह, डा. कशिश गुप्ता, विकास ग्रोवर, अमृत गिल, हैपी प्रिंस, हरजोत नटराज, गुरनूर सिंह, निक्क ढींगरा, दीया अरोड़ा का काम भी प्रशंसनीय है।
*डायरेक्शन व टीम-*
इस फिल्म की कहानी व मकसद देखने वाले के मन को उकसाता है। इस फिल्म की कहानी और डायलॉग का लेखन चंद्र शेखर ने किया है जबकि फिल्म में जान डालने वाला स्करीन पले मनीश मैदान का है। फिल्म के प्रोड्यूसर डा. कशिश गुप्ता, डा. पूजा गुप्ता हैं और निर्देशित करने वाले है कीर्ति कृपाल। डायरेक्शन के नज़रिए से देखा जाए तो कीर्ति किरपाल अपनी जिम्मेवारी निभाने में काफी हद तक सफल हुए है। ख़ास बात यह है कि 30 मिंट की फिल्म इस कदर डायरेक्ट की गई है कि एक्टर की अदाकारी से भी ज्यादा प्रभावशाली उनकी चुप्पी है।
*ओवरऑल फिल्म-*
लघु फिल्म होने के नाते न तो कहानी को और ज्यादा खींचा जा सकता था और न ही कोई और एक्सपेरिमेंट किया जाना चाहिए था। ऐसे में यह एक सार्थक फिल्म है व ऐसे मुद्दे स्क्रीन को स्क्रीन पर लाती है जिसकी चर्चा होनी बहुत जरूरत है। आप सभी इस फिल्म को यूट्यूब के माध्यम से देख सकते है तथा हमे पूरी उम्मीद है कि आपको भी यह फिल्म बहुत पसंद आएगी।
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जसप्रीत सिंह (बठिंडा)


