ज़िन्दगी रुकती नही चलती रहती है वक्त के जैसी हाथ के मुठ्ठी से फिसलती रेत के जैसी कभी महसूस करना जब हम यात्रा में होते है
जितनी स्पीड में वाहन चल रहा होता है उसी स्पीड से हमारे आसपास से दृश्य निकल जाते है वो लेकिन वो अपनी जगह पर स्थिर होते है यात्रा में शरीर रुका होता है लेकिन मन उससे भी ज्यादा गति से दौड़ रहा होता है कितना कुछ पास से गुजर जाता है एक प्रयोग करना बस रेल या जहाज की खिड़की के पास बैठना वैसे हर कोई बैठना भी चहाता है खिड़की के पास एक होड़ सी लगी रहती है खिड़की की सीट की .. बस ऐसी होड़ मन की खिड़की से देखने की भी हो
सरल सा कार्य है ये देखना की कितना कुछ हमारे पास अच्छा है जब अच्छा दृष्टिकोण होगा तो बहुत कुछ अच्छा नजर आएगा चलो गिनती करते है हम सब के पास क्या अच्छा है आओ देखे जो दिखाई देता है उससे परे देखे फिर होगी आपके पास आपके लिए GOOD NEWs …आपने अनुभव सांझे जरूर करे खुद से
क्योकि हम आपने ही मित्र है ….

