नाम – बलबीर सिंह वर्मा “वागीश”
साहित्यिक उपनाम – वागीश
पिता – श्री ओमप्रकाश
माता – श्रीमती रोशनी देवी
सहधर्मिणी – श्रीमती मोनिका देवी
जन्मतिथि – 20 जनवरी 1982
व्यवसाय – शिक्षक
शिक्षा – स्नातकोत्तर हिंदी व अर्थशास्त्र, बी.एड., डी. एड.
प्रकाशन –
ढाई आखर (काव्य संग्रह)
चार साँझा काव्य संग्रह –
भारत के युवा कवि एवं कवयित्रियाँ, भारत के प्रतिभाशाली कवि एवं कवयित्रियाँ, काव्य श्री, मेरी धरती मेरा गाँव
एक साँझा लघुकथा संग्रह- लघुकथा मञ्जूषा
विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन
सम्मान/पुरस्कार –
श्रेष्ठ युवा रचनाकार सम्मान, प्रतिभाशाली रचनाकार सम्मान, हिंदी सागर सम्मान, महाराज कृष्ण जैन स्मृति सम्मान, नवोदित कवि सम्मान, शीर्षक सुमन सम्मान, माँ सरस्वती देवी सम्मान – 2019, अटल साहित्य गौरव सम्मान, अटल भूषण सम्मान, निज भाषा गौरव सम्मान, साहित्य संरक्षक सम्मान, काव्य श्री सम्मान, दोहा भूषण सम्मान, साहित्य सारथी गौरव सम्मान – 2019, “दोहा मयंक” अलंकरण से अलंकृत व विभिन्न साहित्यिक समूहों पर विभिन्न प्रतियोगिताओं में 100 से अधिक विजेता सम्मान पत्र
साहित्य संगम संस्थान द्वारा “वागीश” उपनाम से अलंकृत
पता –
गाँव व डाकखाना – रिसालिया खेड़ा
तहसील – मंडी डबवाली
जिला – सिरसा
राज्य – हरियाणा
पिनकोड – 125103
मोबाइल – 9416788279
ई मेल – [email protected]
परिचय—–
हरियाणा का रहने वाला हूँ,
परिचय मेरा बतलाता हूँ,
न प्रसिद्धि न ख्याति प्राप्त,
लेखनी में हाथ चलाता हूँ,
बीस जनवरी बियासी का दिन,
जब जन्म मैंने था पाया,
मात-पिता और गुरुजनों की,
रहती हरदम छत्रछाया,
एम ए हिंदी और अर्थशास्त्र की,
करी मैंने पढ़ाई,
बी एड के बाद कर जे बी टी,
अध्यापक की नौकरी पाई,
तहसील डबवाली जिला सिरसा,
रिसालिया खेड़ा मेरा ग्राम है,
बस यही है छोटा सा परिचय
और बलबीर मेरा नाम है।
कुण्डलिया छंद—–
पीड़ा मेरे देश की, देख हृदय बेचैन।
कैसे करता सब बयाँ, छलक रहें हैं नैन।।
छलक रहें हैं नैन, करे अपना ही दंगा।
बहे वहीं पर रक्त, जहाँ बहती है गंगा।।
कहे बात बलबीर, उठाओ सब ये बीड़ा।
दंगे हो सब खत्म, मिले न किसी को पीड़ा।।
मानव दंगा कर रहा, जनता है बेहाल।
अपने ही घर को जला, चलता कैसी चाल।।
चलता कैसी चाल, करें क्यों तू मनमानी।
कैसे भी हो छोड़, शरारत ये बचकानी।।
कहता कवि वागीश, बने हो कैसे दानव।
करो सभी से प्रेम, रहो मिलकर सब मानव।।
गीत—–
मेरे दिलबर साथिया, सुन लो ये पैगाम।
मन मंदिर में गूँजता, बस तेरा ही नाम।।
फूलों सा है चेहरा, रेशम जैसे बाल।
कंचन जैसा गात है, लाल गुलाबी गाल।।
सारा दिन आते रहें, बस तेरे ही ख्याल।
दिन कटता है अब सजन, जैसे पूरा साल।।
मधुशाला सम नयन ये,अधर छलकते जाम।
मन-मंदिर में गूँजता, बस तेरा ही नाम।।
छंद इश्क का मैं लिखूँ, मेरे दिलबर यार।
मोहब्बत के रंग से, दिल की कलम उतार।।
तुझसे मेरा काव्य है, तुझसे मेरा छंद।
तेरे मेरे प्रणय से, जीवन में आनंद।।
दिल शायर है आज तो, गाऊँ आठों याम।
मन-मंदिर में गूँजता, बस तेरा ही नाम।।
कैसे तुमसे मैं कहूँ, अपने उर की बात।
समझ सको तो समझ लो, तुम मेरे हालात।।
ऐसे लगता तुम बिना, गया सभी कुछ हार।
विरह हृदय से आपको, करता एक पुकार।।
आओ बनकर जिंदगी, मिले तभी आराम।
मन – मंदिर में गूँजता, बस तेरा ही नाम।।
रात भर मैं जगता रहा—
चाँद निकला, चाँदनी छाई
सितारों संग रजनी आई
दूर गगन चाँद चलता रहा
रात भर मैं जगता रहा
कितने समझे थे अपने
चूर हुए जब सारे सपने
हर कोई मुझे छलता रहा
रात भर मैं जगता रहा
कैसी चली ये पराई रीति
खत्म हुई सब प्रेम-प्रीति
अपनों से ही डरता रहा
रात भर मैं जगता रहा
कहाँ खो गई इंसानियत
फैली हर तरफ हैवानियत
भाई भाई से लड़ता रहा
रात भर मैं जगता रहा
रिश्तों का धुआं जल रहा
नफरत का जहर घुल रहा
जीने के लिये मरता रहा
रात भर मैं जगता रहा
जिन्दगी —-
अपने पराये
तेरे मेरे के बीच
कशमकश में
झूलती है जिन्दगी
सुख – दुःख के
अंधेरे उजाले में
अपने आप को
टटोलती हैं जिन्दगी
मिलता हैं जब
अपनों का साथ
अपनों संग
मुस्काती हैं जिन्दगी
हो जाते जब
अपने ही पराये तो
अपनों बिन
छटपटाती हैं जिन्दगी
जिंदादिली से गर
जीया जाए तो
फूलों सी
महकती हैं जिन्दगी
कभी खुशी कभी गम
उतार चढ़ाव में
पल पल रंग
बदलती हैं जिन्दगी
आस है विश्वास है
बेबस तो कभी लाचार है
चंद साँसों की
मोहताज है जिन्दगी
बलबीर सिंह वर्मा “वागीश”



दिलबागसिंह विर्क
June 10, 2020 at 1:25 pm
आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 11.6.2020 को चर्चा मंच पर चर्चा – 3729 में दिया जाएगा। आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी।
धन्यवाद
दिलबागसिंह विर्क
दिलबागसिंह विर्क
June 10, 2020 at 1:25 pm
आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 11.6.2020 को चर्चा मंच पर चर्चा – 3729 में दिया जाएगा। आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी।
धन्यवाद
दिलबागसिंह विर्क
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
June 11, 2020 at 12:10 am
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज गुरुवार (11-06-2020) को "बाँटो कुछ उपहार" पर भी है।
—
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
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डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
June 11, 2020 at 12:10 am
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज गुरुवार (11-06-2020) को "बाँटो कुछ उपहार" पर भी है।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
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डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'