नारी तू कितने रूपों में कितने किरदार निभाती है
पत्नी माँ बहन नानी दादी भुआ मासी चाची सास
ननद के रिश्तो ………………………………
में सिमट कर भी अकेली नजर आती है
तूने मर्दों को जन्म दिया
मर्दों ने तुझे बाज़ार दिया
खेला तोडा मरोड़ा और बखेर दिया
तू समर्पण
सब अर्पण
कोरवो की शतरंज पर
पांड्वो की हार
जीत में तेरा चीर-हरन
सीता की अग्नि परीक्षा
से लेकर दामनी तक
हजारो सवाल बन कर
हर रोज मर जाती है
और फिर
नया जन्म लेकर
उस समाज को जन्म देती है तू जिस समाज में
घर की चोखट से कॉलेज के दवाजे तक तू सुरक्षत नहीं
नजरो ही नजरो से खतरनाक सोच तेरा पीछा करती है
हादसा बन के रोज अख़बार में तू एक खबर छपती है
क्या लिखू तुझ पे कलम का गर्भ भी शर्मसार है
शब्द भी झूठे अर्थ भी झूठे कागज पर भूचाल है
हे नारी तू माफ़ करना तू माफ़ करना तू माफ़ करना तू माफ़ करना तू माफ़ ……….तुझे नमन
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