औ इबादत में गुस्ताखी नही होती।।
निसंदेह लिखना ही मेरे जीवन का लक्ष्य है।अपने लक्ष्य की पूर्ति के लिये मैं निरंतर प्रयासरत हूं।गीत गज़ल कविता इत्यादि लिखने में जीवन का हसीन सफर रफ्ता रफ्ता गुजर रहा है।।प्रिय दोस्त संजीव शाद के आदेश में आप सब के सामने हाजिर हुए हैं।।राजेन्द्र शर्मा “रैना”
आध्यात्मिक गायक,शायर,कवि लेखक। बराडा़ अम्बाला हरियाणा
मोब.81685 87914
******
ऐसा तो कोई एग्रीमेंट नही होता,
रिश्ता ए दिल परमानेंट नही होता।।
इक चेहरे पे कई चेहरे चढे़ होते,
दिल में क्या है जजमेंट नही होता।।
नशे से दूर जो रहती है जिन्दगी,
उसकी बाॅडी पे कोई डेंट नही होता।।
इम्ताहान में तो उसी ने पास होना,
जो क्लास से कभी अब्सेंट नही होता।।
बोलना उसकी आदत हो जाती है,
नेता कभी भी साइलेंट नही होता।।
यहां हर कोई निभा रहा है अपनी डयूटी,
कोई किसी का सरवेंट नही होता।।
जो भी होना उसकी मर्जी से होना है,
रैना”का कोई भी काम एरजेंट नही होता।।रैना”
************************
नाम तेरा काम मेरा चल रहा है,
ये जमाना बेवजह ही जल रहा है।।
साथ तेरा रास आया है मुझे तो,
वक्त बदला गम का सूरज ढल रहा है।
क्या कहे इस दौर का कैसा चलन है,
आज का इन्सान खुद को छल रहा है।
है बुरा सा हाल दिल का क्या करे हम,
पास रह के दूर होना खल रहा है।
बज्म से उठ के सनम तुम जा रहे हो,
है मुझे तो फिक्र अरमां पल रहा है।
याद कर बिसरे पुराने वो फसाने,
बैठ रैना”हाथ तू क्यो मल रहा है।।रैना”
**************
खुद को खुद का पता नही है,
क्या ये मेरी खता नही है।।
राज मैने समझ लिया है,
मुझसे हरगिज जुदा नही है।।
झूठ सच से बडा़ हुआ है,
मुफ्त मिलती वफा नही है।।
इश्क करना मगर संभल के,
अब वफा की अदा नही है।।
घर से बाहर कभी न जाये,
रोग ऐसा दवा नही है।।
खास रैना”करे गुजारिश,
क्यो मुझे तू मिला नही है।।रैना”
********************
बेहिजाब से बेनकाब अच्छा,
बदगुमान से बेशवाब अच्छा।।
खूब है चलन इस जहान का तो,
हो गया यहां अब खराब अच्छा।।
बेरुखी तेरी ने किये सितम है,
है नही मेरा तो हिसाब अच्छा।
सोचते रहे बैठ कर अकेले
इन्तजार से तो जवाब अच्छा।
बेहतर रहे प्यार से बने जो,
है नही किसी पे दवाब अच्छा।
है खुशी इसी में हमें तो रैना””
मिल गया हमें तो अजाब अच्छा।।रैना”
*************************
हाथ मिलते दिल नही मिलते,
गुल वफा के अब नही खिलते।
कौन किसको हम कहे अपना,
वो न अपने जो हमें दिखते।।
जख्म मन पे जो लगे अक्सर,
वो दवा से तो नही भरते।।
क्यो करे तू जिद्द जीने की,
सांस मर्जी से नही चलते।।
लाख कोशिश कर मगर फिर भी,
तीर तरकस से नही चलते।।
रो रहा रैना”यही दुख है,
गम के सूरज क्यो नही ढलते।रैना””
**********************
आंख में ठहरी नमी को देखिये,
सांस चलती क्यों थमी को देखिये।।
गर्म मौसम तप रहा तन ओ बदन,
बर्फ दिल में है जमी को देखिये।।
कौन क्या लेना तुझे क्या ये बता,
अपने अन्दर की कमी को देखिये।
टूट कर बिखरा सितारा कह रहा,
आस फिर से है जगी को देखिये।
धर्म को बदनाम करता ही रहा,
आग फिर से यूं लगी को देखिये।।
दूर तक दिखता अंधेरा ही जवां,
रात बस्ती वो जली को देखिये।।
काश रैना”का शहर आबाद हो,
खिल रही मन की कली को देखिये।।रैना””
************************
ख्बाव टूटा सजा लिया हमने,
दर्द अपना बना लिया हमने।।
मौत से भी हुआ तआरुफ़ है,
खुद को खुद से बचा लिया हमने।।
बात बनती हुई सदा बिगडी़,
खूब दिल को जला लिया हमने।।
हार फिर भी कभी नही मानी,
रो रहा दिल हंसा लिया हमने।।
देख उनका चलन हुआ बदली,
नाम उसका मिटा लिया हमने।।
लोग उसको बुरा कहे रैना””
राज दिल का छुपा लिया हमने।रैना””
************************
हम तो गुजारिश करते रहे उसने सुनी फरियाद नही,
कुछ भी हम भूले नही उनको कुछ भी याद नही।।
टूटा दिल ले हाथों में जब मैने उनको पेश किया,
जुल्फे झटक के यूं बोले इश्क में आया स्वाद नही।।
इश्क में हासिल रुसवाई दस्तूर यही जमाने का,
आशिक की ऐसी किस्मत है होते कभी आबाद नही।।
इश्क को फ़कत इक सीमा तक मत बांधे जंजीरों में,
इश्क नयामत इबादत है आशिक होता बरबाद नही।।
इश्क करो सच्चा इश्क करो ये सब ही नसीहतें दे रैना”
सच्चा इश्क अगर कोई कर लेता फिर देता कोई दाद नही।।रैना”
ज़िन्दगी ज़िंदाबाद



अनीता टक्कर
May 26, 2020 at 4:07 pm
जीवन का सत्य।ज़िन्दगी जिन्दाबाद
अनीता टक्कर
May 26, 2020 at 4:07 pm
जीवन का सत्य।ज़िन्दगी जिन्दाबाद
Unknown
May 26, 2020 at 4:59 pm
Satya Parkash yadav
Unknown
May 26, 2020 at 4:59 pm
Satya Parkash yadav
Meenakshi Ahuja
May 26, 2020 at 5:58 pm
ज़िंदगी जिंदाबाद।
Meenakshi Ahuja
May 26, 2020 at 5:58 pm
ज़िंदगी जिंदाबाद।