Home updates वो रात..

वो रात..

2 second read
0
0
5

वो रात……….
चाँद भी था तारे भी थे
मगर खमोश दहशत में चुपचाप
अशांत ……
चमकती तलवार
सिसकते आँसू
भागते कदम
डरते चेहरे
लूट
डकैत
चोरी सीन जोरी
बैल गाड़ी से रेलगाड़ी
तक का सफर
और
रिश्तों के बदलते 
ख्याल
टूटते ख्बाव 
सिर पे पेड़ …….पर ग़ुम छाँव
नाख़ून और मास का टूटता विशवास  जब डूबता सूरज भी
ठंडा होकर भीगी हवाओ के साथ बैठ के रोया था है अपना घर छोड़ के  छुप छुप के
आपने वतन आये थे आधे अधूरे……
नही भूलती 14 अगस्त की रात
आधी रात को हुआ था मुल्क आजाद
बस सवेर् का इंतजार…….
जब हमने ली थी
गहरी लम्बी साँस………

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

वो रात..

2 second read
0
0
0

वो रात……….
चाँद भी था तारे भी थे
मगर खमोश दहशत में चुपचाप
अशांत ……
चमकती तलवार
सिसकते आँसू
भागते कदम
डरते चेहरे
लूट
डकैत
चोरी सीन जोरी
बैल गाड़ी से रेलगाड़ी
तक का सफर
और
रिश्तों के बदलते 
ख्याल
टूटते ख्बाव 
सिर पे पेड़ …….पर ग़ुम छाँव
नाख़ून और मास का टूटता विशवास  जब डूबता सूरज भी
ठंडा होकर भीगी हवाओ के साथ बैठ के रोया था है अपना घर छोड़ के  छुप छुप के
आपने वतन आये थे आधे अधूरे……
नही भूलती 14 अगस्त की रात
आधी रात को हुआ था मुल्क आजाद
बस सवेर् का इंतजार…….
जब हमने ली थी
गहरी लम्बी साँस………

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

खेलकूद से पैदा होती है अनुशासन की भावना: डा. संदीप गोयल

जीएनसी सिरसा में नैशनल स्पोर्ट्स डे पर हुआ आयोजन सिरसा: 29 अगस्त: व्यक्तित्व के सर्वांगीण …