कण सेरंगरंग से रूपरूप से आकरआकर से अंहकारअंहकार से कामकाम से क्रोधक्रोध से लोभलोभ से मोहमोह से कल्पना और कल्पना में कल सिर्फ आने वाला कलजल वायु पृथ्वी आकाश और आग और आग के बाद रेत के कणजीवन इक चक्र हैजो घूमता है कण से कण तक और कण कण में जीवन कण कण की मौत…..

