एडवोकेट रणजीत सिंह सिर्फ एक वकील नहीं थे, वे एक मार्गदर्शक थे, एक प्रेरणा थे
अंतिम अरदास व भोग आज
डबवाली -आज हम उस महान शख्सियत को याद कर रहे हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन न्याय, सेवा और समर्पण के लिए समर्पित कर दिया। एडवोकेट रणजीत सिंह – एक ऐसा नाम जो वकालत के पेशे में ईमानदारी, कर्मठता और जनसेवा का पर्याय बन गया। कितने ही लोगों को न्याय दिलाने के लिए उन्होंने अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ी। उन्होंने वर्ष 1966 में डबवाली अदालत में वकालत की प्रेक्टिस शुरु की और थोड़े समय में ही अपराधिक एवं सिविल मामलों को माहिर वकील के तौर पर स्थापित हो गए। उन्हें डबवाली अदालत व जिला सेशन अदालत में लंबे समय तक बेहतरीन कानूनी सेवाएं देने के लिए याद रखा जाएगा। उनके निधन से न्याय के गलियारों में जो शून्य उत्पन्न हुआ है, उसे भर पाना असंभव है।

रणजीत सिंह सिर्फ एक वकील नहीं थे, वे एक मार्गदर्शक थे, एक प्रेरणा थे। गुरु नानक कॉलेज, किलियांवाली से बी.ए. की शिक्षा और चंडीगढ़ से कानून की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने डबवाली और सिरसा में पांच दशकों से अधिक समय तक अपनी कानूनी सेवाएं दीं। वकालत के पेशे के प्रति उनकी निष्ठा और अटूट प्रतिबद्धता थी। वे वर्ष 1987 में बार एसोसिएशन डबवाली के अध्यक्ष एवं 5 बार उपाध्यक्ष भी रहे और वकीलों के हित में उत्कृष्ट कार्य किया। वकालत के साथ-साथ वे कांग्रेस पार्टी से भी जुड़े रहे। 50 वर्ष की प्रक्टिस पूरी होने पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी उन्हें सम्मानित किया था।
कानूनी दांव-पेंचों से परे, रणजीत सिंह का हृदय समाज सेवा के लिए भी धड़कता था। उन्होंने आठ बार गुरुद्वारा प्रबंधन के सचिव के रूप में और एक बार अध्यक्ष के रूप में सेवा करके सामुदायिक भलाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया। खालसा स्कूल के संस्थापक सदस्य और सचिव के रूप में उनका योगदान शिक्षा के प्रति उनके गहरे प्रेम को दर्शाता है। खालसा एजुकेशनल सोसाइटी, डॉ. इकबाल सिंह पन्नू फाउंडेशन, खालसा सीनियर सेकेंडरी स्कूल और दशमेश खालसा पब्लिक स्कूल आज भी उनकी दूरदर्शिता और प्रयासों के ऋणी हैं। गत 18 जनवरी 2024 को उन्हें खालसा एजुकेशनल सोसाइटी द्वारा उन्हें ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्डÓ से नवाजा गया, जो उनके बेजोड़ सफर का एक वास्तविक सम्मान था। स. रणजीत सिंह बहुत ही धार्मिंक प्रवृति के थे एवं अपने घर में ही पिछले 50 साल से उन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप प्रकाश कर रखे हैं।
कम ही लोग जानते हैं कि कानूनी किताबों और मुकदमों से पहले एडवोकेट रणजीत सिंह खेल मैदान के भी सितारे थे। गुरु नानक कॉलेज में वह सर्वश्रेष्ठ एथलीट और कलर होल्डर रहे। शॉटपुट, भाला फेंक और दौड़ में उनकी उपलब्धियां दर्शाती हैं कि वह कितने बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे।
एडवोकेट रणजीत सिंह भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी विरासत, उनके आदर्श और उनके नेक कार्य हमें सदैव प्रेरित करते रहेंगे। वे एक ऐसे प्रकाश स्तंभ थे, जिन्होंने अनगिनत लोगों के जीवन को रोशन किया। उनके दोनों पुत्र इंद्रजीत सिंह व मनमिंदर सिंह भी एडवोकेट हैं जो अपने पिता के दिखाए रास्ते पर चलते हुए लोगों को न्याय दिलाने के कार्य में जुटे हुए हैं। पंजाब के प्रसिद्ध गीतकार भिंदर डबवाली एवं रि. सेशन जज बलजीत सिंह उनके भतीजे हैं। उनके पारिवारिक सदस्यों में स. रणजीत सिंह की बेटी सुखबीर कौर, पुत्रवधू बलविंद्र कौर,भतीजी कुलबीर कौर, पौत्रे जतिंद्र सिंह बठिंडा, गुरप्रीत सिंह गैरी, पोत्री आशु व दोहता रूपिंद्र सिंह आदि सभी एडवोकेट हैं। पारिवार के इन सदस्यों के अलावा उनके वकील साथी भरपूर सिंह एडवोकेट सहित डबवाली व सिरसा जिले के अन्य एडवोकेट भी अपने साथी वरिष्ठ वकील के बिछडने पर गमजदा हैं।
ऐसी महान शख्सियत को कोटि-कोटि नमन।
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