Home News Point प्रथम बरसी पर विशेष: स्व. एडवोकेट दीपक कौशल की जीवन यात्रा समाज के लिए प्रेरणादायक

प्रथम बरसी पर विशेष: स्व. एडवोकेट दीपक कौशल की जीवन यात्रा समाज के लिए प्रेरणादायक

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-वे ऐसे दीपक थे जो हमेशा प्रकाश फैलाते रहेंगे

धरा एक दीपक जले, तारक गगन अनंत, हिम्मत कभी न हारता, तेल बाती पर्यंत
दीपक से सीखो मनुज, जलना पर उपकार, तभी देवता को लगे, दीपक प्रिय करतार

डबवाली
जिंदगी में कर्म का बड़ा महत्व है, कुछ ऐसे कर्म है जो इंसान को कर्मयोगी बनाते है लेकिन मेहनत लग्न ईमानदारी के बल पर संघर्ष करने वाले व्यक्ति समाज में विलक्षण व्यक्तित्व बन जाते है। ऐसे व्यक्ति दीपक बन कर अपनी रोशनी से समाज मे मानवता के कल्याण के लिए प्रकाश फैलाते है। एडवोकेट दीपक कौशल भी ऐसे ही इंसान थे जिनकी शख्सियत विलक्षण थी।
पंजाब के बठिंडा जिले के गांव संगत में 4 अक्टूबर 1954 को पिता वैद्य गौतम सिंह के घर माता सावित्री देवी की कोख से एक बालक का जन्म हुआ जिसका नाम दीपक रखा गया। नाम के साथ गौत्र कौशल भी बचपन में ही जोड़ दिया गया। स्कूल, कॉलेज की शिक्षा पूरी होने के बाद दीपक कौशल ने कानून की पढ़ाई की और एडवोकेट दीपक कौशल बन गए। इसके बाद उन्होंने हक व सच के लिए लड़ाई शुरू की और समाज मे फैली अंधकार रूपी समस्याओं के खिलाफ एक दीपक बनकर एडवोकेट दीपक कौशल ने बहुत से लोगो को न्याय दिलाया। उन्होंने दो बार डबवाली बार एसोसिएशन के प्रधान बनने के साथ-साथ ‘ए डी एÓ के पद पर भी कार्य किया। इसके अलावा जिला  कष्ट निवारण समिति सिरसा के सदस्य भी रहे, अपनी निष्ठा व ईमानदारी के बल पर  हरियाणा सरकार के एडिशनल एडवोकेट जनरल के पद पर सुशोभित हुए। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के कार्यकारिणी समिति के सदस्य बने और दूरसंचार सलाहकार कमेटी के सदस्य के रूप में भी कार्य किया। उन्होंने डबवाली की अनेक सामाजिक संस्थाओं की रजिस्ट्रेशन करवाने में भूमिका अदा की और उनको सही दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित भी किया। उनकी उल्लेखनीय कार्यों को देखते हुए लोग उन्हें बाबू दीपक कौशल एडवोकेट के नाम से पुकारने लगे। गौरक्षा  के लिए दीपक कौशल महाराष्ट्र प्रदेश के वर्धा जिले में  जाकर गौ सेवक स्व. राम लाल बागड़ी जी के साथ विनोबा भावे ओर पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नन्दा से भी मिले व उनकी प्रेरणा से समाज मे कार्य किया। उन्होंने राजनीति में भी सिर्फ सेवा करने के उद्देश्य से ही भाग लिया। डबवाली ब्लाक  कांग्रेस  कमेटी के प्रधान पद से लेकर जिला सिरसा व हरियाणा प्रदेश कांग्रेस  कमेटी के अनेक अहम पदों पर रह कर संगठन का कार्य भी किया। गौरतलब है कि दीपक कौशल एक अच्छे जर्नलिस्ट भी थे। उन्होंने अपनी कलम से सदैव निडर होकर सच लिखा व उनके लेख समय समय पर अनेको अनेक समाचार पत्रों में प्रकाशित होते रहे। बाबु दीपक कौशल एक अच्छे वक्ता, लेखक व कला प्रेमी भी थे। वे हरियाणा प्रादेशिक हिंदी सम्मेलन संस्था के तत्वावधान में प्रचार मंत्री के रूप में कार्य करते हुए प्रचार के लिए कश्मीर व कन्याकुमारी तक गए। कवि सम्मलेन में पूर्व विदेश मंत्री स्व सुषमा स्वराज, स्वामी इंद्रवेश, राष्ट्रीय कवि उदय भानु हंस, रघुनाथ प्यासा, हरि सिंह दिलबर जैसे कवि डबवाली की धरा पर बुलाकर अपनी साहित्यिक रुचि भी दिखाई तथा इन कार्यक्रमों में तत्कालीन मुख्यमंत्री मास्टर हुक्म सिंह व पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा आदि बड़े राजनेताओं को भी आमंत्रित में होने वाली गतिविधियों को गति प्रदान की। युवा वर्ग को साइकल यात्रा व सांस्कृतिक खेल कूद जैसी गतिविधियों से जोड़ा। प्रतिभाशाली बच्चो को हुसैनीवाला शहीदी स्थल की यात्राओं में भेज कर अपने देश प्रेम की भावना को समय समय प्रकट किया। दीपक कौशल सतलुज एजुकेशन सोसाइटी के प्रधान भी रहे, स्थानीय श्री ब्राह्मण सभा व भगवान परशुराम ब्राह्मण सभा के संस्थापक मंडल में रह कर अपने समाज के उत्थान में योगदान दिया।
एडवोकेट दीपक कौशल बहुत ही मिलनसार व मधुर स्वभाव के थे। वो अपने मित्रों के बीच बैठकर सदैव कोई न कोई  सकारात्मक चर्चा करते। उनकी अपनी एक अलग सी अनूठी दुनिया थी, उनके परिजनों को भी पता था कि कौशल साहब को चाय, चर्चा और मित्र मंडली जरुर चाहिए। उनके परिवार में बेटा करुनेश कौशल पंजाब सरकार में असिस्टेंट एडवोकेट जनरल है, वही बेटियां अपने-अपने घर मे सुखी हैं। पत्नी सुदेश कांता कौशल एक शिक्षक के रूप में नौकरी कर रिटायर हुई हैं। जिंदगी का सफर बहुत अच्छा चल रहा था लेकिन वक्त की पटकथा में कुछ और ही लिखा था। इतना खुशदिल इंसान दिल की बीमारी से ग्रस्त हो गया, जीवन रूपी यात्रा मद्रास के प्रसिद्ध हार्ट हॉस्पिटल तक ले गई। हार्ट के सफल ऑपरेशन के बाद भी 5 मई 2024 को बाबु दीपक कौशल एडवोकेट इस दुनिया को अलविदा कह गए। देहांत की सूचना से उनके प्रशंसक, मित्र व रिश्तेदार हतप्रभ रह गए। उनका इस तरह से जाना सब के लिए दुखदायक है लेकिन होनी तो किसी के बस में नहीं, क्योंकि यही सत्य है। स्व. दीपक कौशल एक व्यक्ति से व्यक्तित्व तक का सफर तय करके गए है, वे ऐसे दीपक थे जो हमेशा प्रकाश फैलाते रहेंगे। स्व. दीपक कौशल द्वारा किए उल्लेखनीय कार्य सदैव उनकी याद दिलाते रहेंगे।
प्रथम बरसी पर श्रद्धांजलि सभा रविवारको:  
उनकी प्रथम बरसी पर रविवार, 4 मई को सुबह 9 बजे एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन सतलुज पब्लिक स्कूल, सिरसा रोड, डबवाली के प्रांगण में किया जाएगा। डबवाली इलाके की सामाजिक, राजनीतिक, शैक्षणिक व धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधि व अन्य लोग इस सभा में पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे।

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