Home News Point रामधारी खटकड़ की कविताओं की पुस्तक “आप लड़े बिन मुक्ति कोन्या” का हुआ लोकार्पण कवि सम्मेलन में रचनाकारों ने समाज को दिखाता आईना

रामधारी खटकड़ की कविताओं की पुस्तक “आप लड़े बिन मुक्ति कोन्या” का हुआ लोकार्पण कवि सम्मेलन में रचनाकारों ने समाज को दिखाता आईना

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रोहतक। प्रसिद्ध हरियाणवी कवि, लेखक एवं लोक गायक मास्टर रामधारी खटकड़ की कविताओं की पुस्तक “आप लड़े बिन मुक्ति कोन्या” का लेखक एवं समीक्षक राजेश कापड़ो, डॉक्टर सुरेंदर भारती, डॉक्टर रणबीर सिंह दहिया, मुकेश यादव, डॉ. रमणीक मोहन, अविनाश सैनी एवं तेज सिंह द्वारा विमोचन किया गया।

स्थानीय नितानंद पब्लिक स्कूल के सभागार में राजेश कपड़ो की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में बहु भाषी कवि सम्मेलन का आयोजन भी किया गया जिसमें हरियाणा भर से आए हरियाणवी व हिंदी के कवियों और ग़ज़लकारों ने शिरकत की। डॉक्टर सुरेन्द्र भारती ने अभियान पत्रिका और रामधारी का परिचय देते हुए बताया कि पत्रिका पिछले 38 सालों से अन्धविश्वास, भ्रष्टाचार, नशाखोरी, साम्राज्यवादी लूट, शिक्षा व्यवस्था, बेरोज़गारी तथा महिलाओं, किसानों व मजदूरों के अधिकारों के प्रति आम जनमानस को जागरूक करने का काम कर रही है। रामधारी खटकड़ पहले दिन से ही अभियान पत्रिका से जुड़े हैं और अपनी रागनियों के माध्यम से आम जनता को सरकारों की जनविरोधी नीतियों के प्रति सचेत कर रहे हैं। रामधारी खटकड़ की रागिनी को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा ‘आप मरण तै आच्छा तो हम करकै मरां लड़ाई; पूंजीवाद नै बेशर्मी तै, कैसी लूट मचाई।’मुकेश यादव ने पुस्तक “आप लड़े बिन मुक्ति कोन्या” का परिचय कराते हुए कहा कि रामधारी केवल हरियाणा की बात नहीं करते, अपितु लोकल से गलोबल के अंतर्संबंधों पर बारीक नजर रखते हुए वर्ल्ड बैंक तथा डब्लूटीओ जैसी वैश्विक संस्थाओं को भी बेनकाब करते हैं और साम्राज्यवादी ताकतों की पोल खोलते हैं। उन्हीं के शब्दों में ‘अमेरिका के पंजे म्ह, सरकार दिखाई दे री सै; परमाणु के मुद्दे पै, लाचार दिखाई दे री सै।’ डॉक्टर रणबीर सिंह दहिया व यूपी से प्रकाशित किसान पत्रिका के संपादक प्रवीण ने भी पुस्तक पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि रामधारी जी की रागनियों ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ी जागरूकता फैलाई है और उनसे प्रभावित होकर अनेक रागिनी टीम बन गई हैं। प्रोग्राम की अध्यक्षता करते हुए हरियाणवी रागनी लेखक एवं एडवोकेट राजेश कापड़ो ने कहा कि जन आंदोलनों के साथियों को बड़े समय से इस पुस्तक की प्रतीक्षा थी। इनकी रागनियों में न केवल महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया गया है, बल्कि साहित्य के सौंदर्य की दृष्टि से भी ये उत्कृष्ट हैं। आम जन के प्रति पक्षधरता इनमें बिल्कुल साफ दिखाई देती है। प्रोग्राम का मंच संचालन पत्रकार, कवि एवं नाटककार अविनाश सैनी ने किया।
कवि सम्मेलन की शुरुआत में ही जयसिंह जीत, शकील जठेड़ी, मुरथल से आए जितेन्द्र वशिष्ठ व जींद के आज़ाद सिंह जुलानी ने औजपूर्ण रचनाओं से समां बांध दिया। बहादुरगढ़ से आए जाने माने कवि एवं पत्रकार कृष्ण गोपाल विद्यार्थी, प्रसिद्ध हरियाणवी ग़ज़लकार मंगत राम शास्त्री तथा ईशम सिंह ने अपनी रचनाओं से तीखे व्यंग्य करते हुए सम्मेलन को शिखर पर पहुंचा दिया। स्थानीय साहित्य जगत के सशक्त हस्ताक्षर मुकेश यादव, पवन मित्तल, अविनाश सैनी, भरत जून, चंद्रदत्त शर्मा, खेम चंद सहगल (झज्जर), पवन गहलोत, डॉ. निधि, संदीप और जसमिन्दर की रचनाओं ने कवि सम्मेलन को गहराई एवं विविधता प्रदान करते हुए समाज को आईना दिखाने का काम किया। लेखक एक गायक राजेश दलाल, दिलशेर सिंह, स्नेहा, मुस्कान ने रामधारी खटकड़ की रागनियां गाकर आयोजन की संगीतमय बना दिया। रचनाकारों ने न केवल दर्शकों को सोचने पर विवश किया बल्कि उन्हें भावविह्वल कर खूब वाहवाही भी लूटी। रामधारी खटकड़ ने सबका धन्यवाद करते हुए अपनी एक रचना से कार्यक्रम का समापन किया। उन्होंने कहा कि नए कलमकार अपनी कलम की धार तेज करें और मेहनतकश जनता को न्याय के पक्ष में खड़े करने का काम करें।

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