काव्य कुंज– आओ करे कविता की बात ————————————— मैं मजदूर हूं , मजबूर हूं, फिर भी मजबूत हूं। मुझे नहीं मिला कुछ पर मैं दे रहा हूं, मौका ,,सबको विपक्ष को कटाक्ष का, चैनल को फटाफट सुर्ख़ियों का, गायक को गीत का कवि को कविता का चित्रकार को चित्र का अख़बार को समाचार का और सरकार को जुमलों का, पर हां …
काव्य कुंज|

