‘कविता बेटी, कलम पत्नी, गीत बेटा और विरासत मेरा घर है’ डबवाली (सिरसा)। जिंदगी इक सफर के सिवा कुछ नहीं, देख धीरे चल, भागना तू छोड़ दे। ये कबीला कभी कुछ न देगा तुझे, अपना हक छीन ले, तू मांगना छोड़ दे। मशहूर कोरियोग्राफर संजीव शाद जिंदगी का संघर्ष कुछ यूं बयान करते हैं। उन्हें रंगमंच का ऑलराउंडर कहा जाए …
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