तुम सिर्फ तुमतुम को कभी देखा नही वो भी नही जिसको तुम समझते होतुम मेरी समझ से भी परे हो तुम ही सृष्टि तुम ही दृष्टि तुम ही राधा तुम मीरातुम ही भक्ति तुम ही शक्तितुम ही मन्दिर तुम मूरत तुम जग में तुम जीवन में तुम अगम अगोचर तुम में प्रेम तुम प्रीतम तुम में अंत तुम में आगाज …
सफर खत्म……

