वो रात……….चाँद भी था तारे भी थे मगर खमोश दहशत में चुपचाप अशांत ……चमकती तलवार सिसकते आँसूभागते कदम डरते चेहरे लूटडकैतचोरी सीन जोरीबैल गाड़ी से रेलगाड़ीतक का सफर और रिश्तों के बदलते ख्याल टूटते ख्बाव सिर पे पेड़ …….पर ग़ुम छाँवनाख़ून और मास का टूटता विशवास जब डूबता सूरज भी ठंडा होकर भीगी हवाओ के साथ बैठ के रोया था …
वो रात..

