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नाटक गधे की बारात का यह 331वां मंचन था

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दर्शकों को खूब गुदगुदाया गधे की बारात ने

रोहतक। स्थानीय संस्था हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स (हिपा) द्वारा प्रस्तुत हास्य-व्यंग्य से भरपूर नाटक गधे की बारात अपने चुटीले व्यंग्य बाणों से चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय भिवानी के दर्शकों को गुदगुदाने में सफल रहा। नाटक ने लोगों को जितना हंसाया, उससे अधिक सोचने पर विवश किया कि वर्तमान राजनीतिक, सामाजिक व्यवस्था में गरीब लोगों की क्या दशा है और इसके लिए कौन जिम्मेदार हैं! सूचना और जनसंपर्क विभाग हरियाणा की तरफ से आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत विश्विद्यालय के सर्वपल्ली सभागार में हुए नाटक गधे की बारात का यह 331वां मंचन था

नाटक में अविनाश सैनी, सुरेंद्र शर्मा, शक्ति सरोवर त्रिखा, गर्व कोचर, विकास रोहिल्ला, निकिता, अनिल शर्मा, सोनिया और श्वेता ने अपने जीवंत अभिनय से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। पौराणिक कथा पर आधारित हरिभाई वडगावकर द्वारा लिखित इस नाटक का निर्देशन जाने माने थियेटर प्रमोटर विश्वदीपक त्रिखा ने किया। संगीत सुभाष नगाड़ा का रहा, जबकि मेकअप अनिल शर्मा ने किया। प्रस्तुति के अंत में कलाकारों को वाइस चांसलर महोदय द्वारा स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
गौरतलब है कि गधे की बारात इससे पहले देश के विभिन्न हिस्सों में खेला जा चुका है। हिंदुस्तान के बड़े बड़े मेलों, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, आईएएस अकैडमी मसूरी और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा की नॉर्थईस्ट स्कीम के अंतर्गत गुवाहाटी और आसपास के शहरों के अलावा इस नाटक का मंचन पाकिस्तान के लाहौर शहर में भी हो चुका है। मजे की बात है कि इस नाटक के कलाकार 1990 से लेकर अब तक लगातार इसे प्रस्तुत कर रहे हैं। बहुत से कलाकार तो ऐसे हैं जो पहले शो में भी थे और आज भी इस नाटक का हिस्सा हैं। नाटक के निर्देशक विश्व दीपक त्रिखा ने बताया कि गधे की बारात की अगली प्रस्तुति दिल्ली के सिविल सर्विसेज ऑफिसर इंस्टिट्यूट में होगी। विश्व दीपक त्रिखा ने बताया कि नाटक अब तक के उत्तर भारत के इतिहास में सबसे अधिक खेला गया नाटक है। किसी भी शौकिया रंग मंडली का नाटक इतनी बार नहीं खेला गया है। इससे पहले शायद रीटा शर्मा का नाटक गुड मैन दी लालटेन का 160 प्रस्तुतियों का रिकॉर्ड है। उन्होंने इच्छा जाहिर की कि वे इस नाटक के 555 शोज करने का तलबगार हैं।

विश्वदीपक त्रिखा

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