रोहतक, 15 मार्च। ‘कहते हैं कि आमतौर पर झगड़ा पुरुष के अहम और स्त्री की ज़िद से शुरू होता है। नोक झोक तक तो ठीक है, लेकिन अगर तकरार लड़ाई-झगड़े में बदल जाए तो परिवार या रिश्तों के टूटने का सबब बन जाती है।’ यही बात उभरकर आई संडे थियेटर में इस बार के नाटक ‘द मैरिज प्रोपोजल’ में। सप्तक …

